ऑक्सीजन का टंटा! अब उच्च न्यायालय ने ही कहा ‘ये लहर नहीं सुनामी है’

ऑक्सीजन की कमी का सामना कोरोना प्रभावित कर रहे हैं। अब तक अस्पताल में बिस्तर, ऑक्सीजन सहायता और वेंटिलेटर की मांग पूरी करने की आपाधापी में प्रशासन लगा हुआ है। लेकिन, अब ऑक्सीजन की कमी प्राण लेने लगी है।

अस्पतालों में प्राण वायु के कण-कण के लिए संक्रमित तड़प रहे हैं। अस्पताल अपने प्राण वायु स्टॉक का हिसाब किताब रखकर परेशान हैं। दिल्ली के महाराजा अग्रसेन अस्पताल ने इस विषय में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। जिसमें मांग की गई थी कि न्यायालय उनके अस्पताल में प्राण वायु (ऑक्सीजन) की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आदेश दे।

इस याचिका की सुनवाई में उच्च न्यायालय ने स्थिति की गंभीरता का अवलोकन करते हुए कहा कि,
यह लहर नहीं सुनामी है। अभी भी मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। हम आशा करते हैं कि मई के मध्य में पीक होगा, इसकी क्या तैयारी कर रहे हैं।

केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि आगामी सप्ताह में नए मामलों में तेजी आ सकती है, इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन हमें सबसे बुरे काल के लिये तैयार रहना होगा।

महाराजा अग्रसेन अस्पताल ने न्यायालय को बताया कि 306 रुग्ण के साथ वे दो अस्पताल चला रहे हैं, शुक्रवार रात ही उनके यहां ऑक्सीजन खत्म होनेवाली थी।

केंद्र से मांगा ब्यौरा
उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से ऑक्सीजन आपूर्ति को लेकर विस्तृत ब्यौरा मांगा है इसके अलावा दिल्ली सरकार को अपना ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने को कहा है। न्यायालय ने चेताया है कि यदि कोई ऑक्सीजन सप्लाई में बाधा उत्पन्न करेगा तो उसे छोड़ा नहीं जाएगा।

दिल्ली को कब मिलेगी पूरी क्षमता से ऑक्सीजन
उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार से कड़ाई से पूछा कि निश्चित तारीख बताई जाए कि कब तक 480 मिट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति हो पाएगी। कोई इस विषय में संदेह नहीं कर रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि 480 मिट्रिक टन ऑक्सीजन दिल्ली तक नहीं पहुंच पा रही है। लोगों को ऐसे मरने नहीं दिया जा सकता।

हो गई तीखी नोंकझोंक
उच्च न्यायालय में बहस के दौरान दिल्ली सरकार के अधिवक्ता और भारत सरकार के महाधिवक्ता के मध्य तीखी नोंकझोंक हो गई। इसमें महाधिवक्ता ने दिल्ली सरकार के अधिवक्ता को चेतावनी भी दी।

जयपुर में ऑक्सीजन की कमी से 25 की गई जान
उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान जयपुर गोल्डन अस्पताल की ओर से सूचित किया गया कि ऑक्सीजन आपूर्ति न होने के कारण उनके यहां 25 मरीजों की मौत हो गई है।

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