काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद विवादः नहीं पूरी हो पाई बहस, अब इस तारीख को होगी सुनवाई

अंजुमन इंतजामिया मस्जिद वाराणसी व सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की तरफ से वाराणसी की अधीनस्थ न्यायालय के आदेश को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है।

ज्ञानवापी मंदिर मस्जिद विवाद को लेकर दाखिल याचिका पर मंदिर के अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी की बहस पूरी नहीं हो सकी। अगली सुनवाई 10 मई को होगी।

अंजुमन इंतजामिया मस्जिद वाराणसी व सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की तरफ से वाराणसी की अधीनस्थ न्यायालय के आदेश को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। याचिकाओं की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया कर रहे हैं।

रस्तोगी ने कहा कि सम्पत्ति वक्फ सम्पत्ति के रूप में पंजीकृत होने मात्र से उस पर गैर मुस्लिमो का अधिकार खत्म नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि 1960 के वक्फ एक्ट में 1984 में संशोधन किया गया, किन्तु वह लागू नहीं हो सका। संशोधन में वक्फ बोर्ड व गैर मुस्लिम के बीच सम्पत्ति विवाद की दशा में नोटिस विश्वनाथ मंदिर द्वारा जारी किया जाना अनिवार्य है। किंतु वादी विपक्षी को कोई नोटिस नहीं दी गई। इस कारण भी वक्फ एक्ट इस मामले में लागू नहीं होगा।

रस्तोगी ने कहा कि 1995 का वक्फ एक्ट लागू किया गया तो सभी वक्फ सम्पत्तियों का दुबारा पंजीकरण करना अनिवार्य किया गया है। किंतु प्रश्नगत विवादित सम्पत्ति कभी भी दुबारा पंजीकृत नहीं कराई गई है। इसलिए विवादित सम्पत्ति को वक्फ सम्पत्ति नहीं माना जा सकता। रस्तोगी ने कहा कि पंजाब वक्फ बोर्ड बनाम शैम सिंह केस में कहा गया है कि विवादित जमीन वक्फ सम्पत्ति नहीं हो सकती।

रस्तोगी ने कहा कि 1936 में दीन मोहम्मद, मोहम्मद हुसैन व मोहम्मद जकारिया तीन लोगों ने बनारस अधीनस्थ अदालत में घोषणात्मक वाद दायर किया था। जिसमें मौजा शहर खास, परगना देहात अमानत, बनारस गाटा 9130 रकबा एक बीघा नौ बिस्वा छह धूर, चबूतरा, पेड़, पक्का कूंआ आदि को वक्फ सम्पत्ति घोषित करने और अलविदा नमाज पढ़ने की प्रार्थना की गई थी। कोर्ट ने दावा साबित न कर पाने के कारण खारिज कर दिया। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में प्रथम अपील 1937 में दाखिल की गई। जो 1942 में निर्णित हुई। जिसमें केवल वादी को ही नमाज पढ़ने की राहत मिली थी। जिसका फायदा दूसरा कोई नहीं उठा सकता। इसलिए याचिका खारिज की जाये।

केंद्र सरकार के अपर सालिसिटर जनरल वरिष्ठ अधिवक्ता शशि प्रकाश सिंह व राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता एम सी चतुर्वेदी ने कहा कि जो भी कोर्ट आदेश करेगा, वे पालन करेंगे। कोर्ट ने अधीनस्थ न्यायालय के विवादित परिसर का सर्वे कराने के आदेश पर लगी रोक 31 मई तक बढ़ा दी है।

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