देश में बच्चे पैदा करने को लेकर बहस जारी रहती है। लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि मुसलमान सबसे ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं। उनकी प्रजनन क्षमता आज भी अन्य समुदायों से अधिक है। हालांकि 1992 से तुलना करें तो उनकी प्रजनन क्षमता काफी कम हुई है और तब जहां प्रति मुस्लिम महिला 4.4 बच्चे थे, वहीं अब 2.6 बच्चे हो गए हैं। प्रजनन के मामले में दूसरे क्रमांक पर हिंदू हैं, वहीं जैन का प्रजनन क्षमता सबसे कम है। यह जानकारी अमेरिकी थिंक टैंक के सर्वेक्षण में प्राप्त हुई है। इस सर्वेक्षण में यह स्पष्ट किया गया है कि सभी समुदायों की प्रजनन क्षमता कम हुई है।
एक गैर पक्षपाती संगठन की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि हर धार्मिक समुदाय की प्रजनन क्षमता में कमी आई है। इनमें बहुसंख्यक हिंदू के साथ ही मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और जैन समुदाय शामिल हैं। इस शोध में हिंदू 2.1 प्रजनन क्षमता के साथ मुसलान के बाद दूसरे क्रमांक पर है। जैन में प्रजनन दर मात्र 1.2 यानी सबसे कम है।
पैटर्न में बदलाव नहीं
शोध के अनुसार 1992 की तुलना में सभी समुदायों की प्रजनन दर में गिरावट तो आई है लेकिन पैटर्न में कोई बदलाव नहीं आया है। मुसलाम जहां प्रथम क्रमांक पर है, वहीं हिदू दूसरे क्रमांक पर हैं। 1992 के सर्वेक्षण में मुसलमानों का प्रजनन दर 4.4 और हिंदुओं का 3.3 था। हालांकि 1992 के बाद मुस्लिम महिलाओं के हिंदू महिलाओं की तुलना में औसतन 1.1 अधिक बच्चे होने की उम्मीद थी, 2015 तक यह अंतर 0.5 हुआ।
धार्मिक मान्यता कारण
रिपोर्ट के अनुसार भारत की धार्मिक मान्यता की वजह से देश में मुसलमानों की आबादी अन्य धार्मिक समुदायों की तुलना में तेजी से बढ़ी है। लेकिन प्रजनन में गिरावट के कारण 1951 के बाद धार्मिक जनसंख्या में केवल मामूली परिवर्तन आए हैं।