2020 के सुप्रीम फैसले!

2020 की विदाई में अब चंद दिन ही बाकी रह गए हैं। वैसे तो यह कोरोना वायरस को लेकर तबाही का साल रहा, लेकिन इस बीच भी देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने कई ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं।

2020 की विदाई में अब चंद दिन ही बाकी रह गए हैं। वैसे तो यह कोरोना वायरस को लेकर तबाही का साल रहा, लेकिन इस बीच भी देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने कई ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं।

पेश हैं 2020 के सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले

  • सुप्रीम कोर्ट ने 7 अक्टूबर को अपने अहम फैसले में कहा कि धरना-प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इसके साथ ही हमारा कर्तव्य भी तय किया गया है। प्रदर्शन के नाम पर सड़क पर जमा होकर दूसरों के लिए परेशानी पैदा नही की जा सकती है। इस हाल में प्रशासन की ड्यूटी है कि वह लोगों को ऐसी जगह से हटाए।
  • किसानों का धरना-प्रदर्शन करना उनका मौलिक अधिकार है। 17 दिसंबर को किसानों के प्रदर्शन के मामले में दिए गए अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि पब्लिक दायरे में प्रदरशन करना किसानो का मौलिक अधिकार है। जब तक प्रदर्शनकारी शांति भंग या कानून का उलंलंघन नहीं करते, तब तक उन्हें रोका नही जा सकता।
  • 10 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इंटरनेट सेवा हमेशा के लिए बंद नहीं की जा सकती। इसके साथ ही 144 का इस्तेमाल भी तभी हो सकता है,जब खतरे का आशंक हो। धारा 144 का इस्तेमाल इसलिए नहीं किया जा सकता कि किसी वैध अभिव्यक्ति या लोकतांत्रिक अधिकार को दबाया जाए। कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट का अधिकार संवैधानिक अधिकार है। सरकार जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट बैन की समीक्षा करे।
  • सुप्रीम कोर्ट ने अपने 27 नवंबर के फैसले में कहा कि लोगों की लिबर्टी सर्वोपरि है। क्रिमनल केसों की निस्पक्ष जांच जरुरी है, लेकिन अदालतों को सुनिश्चित करना होगा कि किसी नागरिक को प्रताड़ित करने के लिए क्रिमिनल लॉ का इस्तेमाल हथियार के तौर पर न हो। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि मानवीय लिबर्टी बहुमूल्य संवैधानिक अधिकार है।
  • 17 फरवरी को दिए महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने आर्म्ड फोर्स महिलाओं के साथ भेदभाव को खत्म कर दिया और कहा कि महिला ऑफिसर्स को परमानैंट कमिशन मिलेगा। कोर्ट ने उनके लिए कमांड पोजिशन का रास्ता भी साफ कर दिया।ये भी पढ़ेंः नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह के लिए क्यों छोड़ी कुर्सी?
  • 11 अगस्त को दिए गए सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बेटी को अपने पैतृक संपत्ति में बेटे के बराबर का अधिकार देने का फैसला किया। हिंदू उत्तराधिकार संशोधन अधिनियम 2005 के बाद हुई हो या पहले पैदा हुई हो, उसको बेटे के बराबर हिंदू अनडिवाइडेड फेमिली के संपत्ति अधिकार होगा।
  • 15 अक्टूबर को दिए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संपत्ति मालिक अगर डोमेस्टिक रिलेशनशिप में हो तो बहू को संपत्ति में रहने का अधिकार है। यानी सास-ससुर अगर डोमेस्टिक रिलेशनशिप में हैं को बहू शेयर्ड हाउस होल्ड प्रॉपर्टी में रह सकती हैं।
  • सुशांत सिह राजपूत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 19 अगस्त को अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि मामले में सीबीआई जांच हो और इसमें महाराष्ट्र सरकार सीबीआई को सहयोग करे।
  • कोर्ट ने राइट  टु हेल्थ को मौलिक अधिकार बताया। सर्वोच्च अदालत ने 18 दिसंबर को दिए अपने फैसले में कहा कि राइट टु हेल्थ मौलिक अधिकार है और अनुच्छेद 21 इसकी गारंटी देता है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह लोगों को सस्ते इलाज उपलब्ध कराए।
  • इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय ने अदालतों को कोरोना काल में मामलो की सुनवाई वीडिया कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए करने का आदेश दिया।
  • सुप्रीम कोर्ट ने ड्रग्स  के मामले में पुलिस के समझ दिया गया बयान साक्ष्य के तौर पर नहीं माने जाने का भी फैसला सुनाया।

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