इस काम के लिए पुलिस को सलाम!

महाराष्ट्र के कर्जत में पुलिस का एक मानवीय चेहरा देखने को मिला है। मुश्किलों के बीच इन्होंने अपनी कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देकर मिसाल पेश की।

मुंबई जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध शहर से थोड़ी दूरी पर लोनावला और कर्जत घाट सुविधाओं से वंचित हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रशासन घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए मामूली स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। इसका जीता-जागता उदाहरण देखने को मिला है। लोनावला घाट इलाके में पुलिस को एक घायल महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसका एक वीडियो वायरल हो रहा है। ऐसे पुलिस वालों की कर्तव्यनिष्ठा को देखर मन संतोष और सुकून से भर जाता है। ऐसे पुलिस वालों को सैल्यूट करने का दिल करता है।

4 किमी की कठिन यात्रा, ऐसे निभाया अपना धर्म
मुंबई रेलवे के मुख्य नियंत्रण कक्ष के अनुसार लोनावला घाट और जामनेर तथा पलसदरी रेलवे स्टेशनों के बीच एक आदिवासी महिला घायल हो गई। जानकारी मिलने के बाद 31 मई को दोपहर करीब 12 बजे पुलिस उपनिरीक्षक टीएन सरकाले, पुलिस अधिकारी ज्ञानेश्वर गंगुर्डे, तुषार तुर्दे और मंगेश गायकवाड़ सरकारी वाहन से पलसदरी पहुंचे, लेकिन वहां से आगे जाने के लिए कोई सड़क नहीं थी। इसलिए पुलिस 4 किमी पैदल चलकर घाट पर उतरी और वहां से रेलवे लाइन पर पहुंची। इसके बावजूद घायल महिला आधे घंटे रेलवे ट्रैक पर चलने के बाद मिली। वहां एक 44 वर्षीय आदिवासी महिला घायल अवस्था पड़ी थी। उसकी कमर और पैर में चोट आई है।

नहीं था कोई साधन
बेहोश महिला को ले जाने का कोई साधन नहीं था। आखिरकार पुलिस ने चादर का थैला बनाया और चार किलोमीटर  घाट चढ़कर उसे पलसदरी ले आई। परेशानी यह थी कि वहां भी एंबुलेंस की सुविधा नहीं थी। आखिरकार पुलिस ने निजी एंबुलेंस बुलाई और महिला को कर्जत के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद पुणे रेलवे पुलिस को सूचित किया गया क्योंकि यह स्थान पुणे रेलवे की सीमा में आता है। महिला आदिवासी जनजाति से है और लोनावला के कार्ले में रहती है।उसका नाम आशाबाई वाघमारे है।

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सुविधाओं का अभाव
कर्जत और लोनावला के घाट इलाकों में अगर कोई बीमार आदिवासी महिला इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना चाहती है तो इसके लिए कोई साधन नहीं है। मरीज को यहां से ​​ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं है। यहां तक कि स्ट्रेचर तक नहीं है। इसलिए पुलिस को पैदल ही चलना पड़ा। निश्चित रुप से पुलिस की ऐसी कर्तव्यनिष्ठा सैल्यूट करने योग्य है। एक तरफ जहां पुलिस की अमानवीय हरकतों को देखकर मन दुखी और परेशान हो जाता है, वहीं इन पुलिस वालों की सेवा देखकर मन में उम्मीद और सुकून के असंख्य दीये जलने लगते हैं।

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