इस बार जीत पर नहीं लगा पाएंगे ठुमके! चुनाव आयोग ने दिया झटका

कोविड 19 के प्रसार में चुनावी रैलियों की भूमिका पर प्रश्न खड़े हो रहे थे। सभी राजनीतिक दलों द्वारा आयोजित की गई रैलियों में अपार भीड़ इकट्ठा की गई थी।

चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में होनेवाले विधान सभा चुनाव और कुछ राज्यों में स्थानीय निकाय के चुनाव के बाद ठुमकों पर रोक लग गई है। चुनाव आयोग ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। मद्रास उच्च न्यायालय ने एक दिन पहले ही चुनाव आयोग पर चुनाव प्रचार में कोरोना दिशानिर्देशों का पालन करवाने में असफल रहने के उत्तर मांगा था। इसके लिए न्यायालय ने मतगणना के लिए कोविड 19 दिशानिर्देशों के पालन को लेकर एक ब्लू प्रिंट बनाने का निर्देश दिया है। माना जा रहा है कि इसी के अनुरूप चुनाव आयोग ने अब मतगणना में विजयी उम्मीदवारों के समर्थकों के विजय जुलूस पर रोक लगा दी है।

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चुनाव है तो रैली तो होगी है, लेकिन महामारी है तो उससे बचने के उपाय भी अपनाने होंगे। इन दोनों का तारतम्य भूले चुनाव आयोग को मद्रास उच्च न्यायालय की टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। न्यायालय ने तो चुनाव आयोग के अधिकारियों पर हत्या का मामला दर्ज करने की बात सुनवाई में कह दी। इससे चुनाव आयोग ऐक्शन मोड में आ गया है। आयोग ने मतगणना वाले दिन यानी की 2 मई को सभी विजय कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगा दिया है। आयोग के प्रारंभिक दिशानिर्देश के अनुसार विजयी उम्मीदवार मात्र समर्थकों के साथ विजय प्रमाण पत्र लेने जा सकता है।

ब्लू प्रिंट पेश करो, मतगणना पर रोक
मद्रास उच्च न्यायालय ने कोविड 19 संक्रमण काल में दिशानिर्देशों के उल्लंघन को लेकर चुनाव आयोग से कड़े सवाल किये थे। न्यायालय ने 30 अप्रैल तक चुनाव आयोग से मतगणना में कोविड 19 दिशानिर्देशों का कैसे पालन होगा इसका एक ब्लू प्रिंट पेश करने को कहा है। इसमें असफल होने पर न्यायालय ने मतगणना पर रोक लगाने की चेतावनी दी है।

 

 

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