स्वातंत्र्यवीर सावरकर के अनुयायी प्रताप वेलकर का निधन

वरिष्ठ सनदी वास्तु रचनाकार और इतिहासकार प्रतापराव वेलकर का निधन हो गया है। मुंबई महानगर पालिका के नगर नियोजन कार्य और इतिहास संशोधन और लेखन में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके निधन पर स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक की ओर श्रद्धांजलि व्यक्त की गई है।

प्रतापराव वेलकर ने इसी वर्ष अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश किया था। उन्होंने इतिहास संशोधन और लेखन में बहुत कार्य किया। प्रताप वेलकर का डॉ.नारायण दामोदर सावरकर के प्रति विशेष लगाव था। अपने इसी लगन के कारण उन्होंने डॉ.ना.दा सावरकर के जीवन पर अध्ययन शुरू किया। इसके लिए उन्होंने प्रशासन के संबंधित विभागों में आवेदन करके पुलिस के दस्तावेजों को खंगाला, ऐतिहासिक अभिलेखों में पड़े साक्ष्यों की प्रतियां प्राप्त की। इसके लिए उन्हें लंबे काल तक सरकारी विभागों के चक्कर काटने पड़े। इसके उपरांत जो वस्तुनिष्ठ प्रतियां प्राप्त हुईं, उसे सम्मिलित करते हुए उन्होंने डॉ.ना.दा सावरकर की जीवनी लिखी। यह ग्रंथ स्वातंत्र्यकाल में देश के सांस्कृतिक, सामाजिक और सशस्त्र क्रांति के इतिहास का प्रस्तुतिकरण है।

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प्रताप वेलकर के पिता डॉ.मोतीराम वेलकर भी लोकमान्य तिलक के अनुयायी थे। प्रताप वेलकर ने लोकमान्य तिलक और डॉ.वेलकर के राजनीतिक आंदोलनों पर एक पुस्तक भी लिखी है। इस पुस्तक ने लोकमान्य तिलक के जीवन के उन पहलुओं को प्रस्तुत किया जो इतिहास में अछूता रह गया था। मराठी में लिखे उनके ग्रंथ लोकमान्य तिलक और डॉक्टर वेलकर, तीसरा सावरकर, पाठारे प्रभूंचा इतिहास, हिंदू साम्राज्याचा इतिहास, विक्रम सावरकर महावीर भासे हा! बहुत प्रचलित है।

स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक की कोषाध्यक्ष मंजिरी मराठे ने प्रताप वेलकर के निधन पर अपनी संवेदना व्यक्त की है। श्रद्धांजलि संदेश में उन्होंने कहा कि, प्रताप वेलकर द्वारा शहर के लिए किये गए उल्लेखनीय कार्य, इतिहास संशोधक के रूप में उनकी निष्ठा और इतिहासकार के रूप में उसका प्रामाणिक प्रस्तुतिकरण आगामी पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहेगा।

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