दत्तात्रय होसबाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह निर्वाचित

दत्तात्रय होसबाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह बनाए गए हैं। इसके पहले वे सह-सरकार्यवाह की जिम्मेदारियों का वहन कर रहे थे।

बेंगलुरु में चल रही संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में सरकार्यवाह पद के लिए दत्तात्रेय होसबाले का निर्वाचन हुआ है। वे 2008 से सह सरकार्यवाह का दायित्व निर्वहन कर रहे थे।

जीवन परिचय

  • दत्तात्रय होसबाले मूलरूप से कर्नाटक के शिमोगा से हैं। अंग्रेजी में स्नातक हैं।
  • वर्ष1968 में 13 वर्ष की अवस्था में संघ के स्वयंसेवक बने
  • वर्ष 1972 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से जुड़े और 15 वर्षों तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के अखिल भारतीय संगठन मंत्री रहे।
  • वर्ष 1975-77 के जेपी आन्दोलन में भी सक्रिय थे और लगभग पौने दो वर्ष ‘मीसा’ के अंतर्गत जेलयात्रा भी झेली। जेल में दो हस्तलिखित पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया।
  • वर्ष 1978 में नागपुर नगर सम्पर्क प्रमुख के रूप में विद्यार्थी परिषद् में पूर्णकालिक कार्यकर्ता हुए। विद्यार्थी परिषद में अनेक दायित्वों का निर्वहण करते हुए परिषद के राष्ट्रीय संगठन-मंत्री के पद को सुशोभित किया।
  • गुवाहाटी में युवा विकास केन्द्र के संचालन में आपकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही।
  • अंदमान निकोबार द्वीप समूह और पूर्वोत्तर भारत में विद्यार्थी परिषद् के कार्य-विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका आपकी रही है ।
  • आपने ने नेपाल, रूस, इंग्लैण्ड, फ्रांस और अमेरिका की यात्राएँ की हैं।
  • भारतवर्ष की असंख्य बार प्रदक्षिणा की है।
  • वर्ष 2004 में ये संघ के अखिल भारतीय सह-बौद्धिक प्रमुख बनाए गये।
  • वर्ष 2008 से सह-सरकार्यवाह के दायित्व पर कार्यरत रहें हैं।
  • ‘असीमा’ नामक कन्नड़ मासिक पत्रिका के संपादक भी रह चुके हैं।

इसके अलावा ने इंडिया पॉलिसी फाउंडेशन के संस्थापक विश्वस्त रहे हैं। दत्तात्रय होसबाले को कन्नड़, हिंदी, अंग्रेजी के अलावा तमिल और संस्कृत भाषाओं का भी अच्छा ज्ञान है।

प्रतिनिधि सभा में हुई घोषणा
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभी की बैठक बेंगलुरू में चल रही है। जिसमें दत्तात्रय होसबाले को सरकार्यवाह के पद पर निर्वाचित किया गया। उनके साथ इस पद के लिए भैय्याजी जोशी और सुरेश सोनी भी थे।
बेंगलुरू में 19 और 20 मार्च की दो दिवसीय प्रतिनिधि सभी का बैठक थी। जिसमें 11 क्षेत्र और 44 प्रांत के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। साधारणतया इस सभा में 1500 के लगभग प्रतिनिधि हिस्सा लेते हैं लेकिन इस बार कोरोना काल के कारण मात्र 450 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया है। वैसे अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभी की बैठक तीन दिन की होती है जिसे इस बार दो दिनों का किया गया है।

ऐसे होता है सरकार्यवाह का चुनाव
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक प्रति तीन वर्ष पर होती है। जिसमें तीन वर्षों के मध्य किये गए कार्यों का लेखाजोखा पेश किया जाता है। इसमें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्य विस्तार पर भी चिंतन होता है। इसके पश्चात मतदान होता है और नए सरकार्यवाह का चयन होता है।

 

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