गोपाष्टमी पर पूजी गई गौमाता, मंदिरों और मठों की गोशालाओं में पर्व की धूम

शहर के मंदिरों और मठों की गोशालाओं में गौमाता का पूजन किया गया।

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर 1 नवंबर को काशी में गोपाष्टमी मनाई जा रही है। शहर के मंदिरों और मठों की गोशालाओं में गौमाता का पूजन किया गया। सुबह नौ बजे से गो पूजन आरंभ हुआ। इस दौरान गौ माता का विधिवत श्रृंगार कर उन्हें विशिष्ट भोग दलिया, फल, गुड़ एवं हरा चारा आदि चढ़ाया गया। गोमाता के पूजन के बाद दर्शन एवं गुड़ चना खिलाने का क्रम चलता रहा। पर्व पर दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ परिसर में गौमाता का पूजन किया गया।

गौमाता के पूजन में धर्मसंघ शिक्षा मंडल के सचिव जगजीतन पांडेय, सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी, रोहनिया के पूर्व विधायक सुरेन्द्र नारायण सिंह ‘औढ़े’, भाजपा के महानगर अध्यक्ष विद्यासागर राय आदि शामिल रहे।

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गौरतलब हो कि गोपाष्टमी पर्व पर गाय की पूजा कर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। पूजा-पाठ के बाद गाय की परिक्रमा कर उनके पैर के स्थान की मिट्टी को लोग माथे पर लगाते है। माना जाता है कि गाय की पूजा कर उन्हें प्रणाम करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। गोशालाओं में आज के दिन गायों का कुछ यूं श्रृंगार होता है कि लोग गौमाता को अपलक देखते रह जाते हैं।

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