नागालैंड – क्या है सेना का बांबी बकेट ऑपरेशन?

नागालैंड के दजुकोउ घाटी में नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ) के 60 जवान आग बुझाने में लगे हुए हैं। ये स्थान नागालैंड की राजधानी कोहिमा में स्थित है।

नागालैंड के जंगल में लगी आग को बुझाने के लिए सेना के हेलीकॉप्टर्स को लगाया गया है। इसके लिए वायु सेना ने बांबी बकेट ऑपरेशन शुरू किया है। मंगलवार दोपहर से प्राकृतिक रूप से अति सुंदर दजुकोउ घाटी में आग लगी हुई है।

नागालैंड के दजुकोउ घाटी में नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ) के 60 जवान आग बुझाने में लगे हुए हैं। ये स्थान नागालैंड की राजधानी कोहिमा में स्थित है। आग पर स्थानीय स्तर पर काबू पाने में सफल न होने पर राज्य सरकार ने सेना से सहायता मांगी थी। जिसके बाद वायु सेना के एमआई वी-5 हेलीकॉप्टर और सी-130 जे हरक्युलिस को लगाया गया है। भारतीय सेना के प्रवक्ता के अनुसार वायु सेना ने दजुकोउ में आग्निशमन के लिए बांबी बकेट ऑपरेशन शुरू किया है। इसमें चार हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं।

ये है बांबी बकेट ऑपरेशन

इसमें पूरी तरह से खुलनेवाली वॉल्व युक्त बकेट लगी होती हैं। जो पायलट नियंत्रित करता है। इस वॉल्व लगे बकेट में पानी और अग्निशमन के लिए आवश्यक रसायन भरकर अग्नि वाले स्थान पर भेजा जाता है। बांबी बकेट का उपयोग अब 110 देशों में बड़े स्तर पर जंगल की आग को बुझाने में किया जाता है। हेलीकॉप्टर द्वारा ले जाए जा रहे बकेट के वॉल्व को अग्नि के स्थान पर खोल दिया जाता है। जिससे बकेट का रसायन युक्त पानी अग्नि के स्थान पर एक साथ पूरी तीव्रता से फैल जाता है और बड़े क्षेत्र में फैलती आग बुझा जाती है। बांबी बकेट में एक बार में 270 लीटर पानी से लेकर 9,840 लीटर पानी भरा जा सकता है। अब ये बकेट 20 अलग-अलग साइजों में उपलब्ध होती है।

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