राफेल सौदे में बड़ा भ्रष्टाचार, फ्रेंच मीडिया के दावे में कितना दम?

फ्रांस की वेबसाइट मीडिया पार्ट ने राफेल को लेकर बड़े दावे कर नया विवाद खड़ा कर दिया है। खबर में दावा किया गया है कि इस सौदे में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है।

फ्रांस से राफेल की चार खेप अब तक भारत पहुंच चुकी है और कुल मिलाकर अब तक भारत में 14 राफेल आ चुके हैं। इसी महीने यानी अप्रैल 2021 में 7 से 9 राफेल और पहुंचने की संभावना है। लेकिन विवाद हैं कि थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब फ्रांस की वेबसाइट मीडिया पार्ट ने राफेल को लेकर बड़े दावे कर नया विवाद खड़ा कर दिया है। खबर में दावा किया गया है कि इस सौदे में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार राफेल लड़ाकू विमान सौदे में गड़बड़ी का सबसे पहले पता फ्रांस की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी एएफए को 2016 में हुए इस सौदे पर हस्ताक्षर होने के बाद लगा। एएफए को जानकारी मिली कि राफेल बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट एविएशन ने एक बिचौलिए को 10 लाख टूरो देने पर सहमति दिखाई थी। हालांकि एएफए ने इस मामले को प्रोसिक्यूट के हवाले नहीं किया था।

राशि खर्च होने वाले मद से काफी अधिक
फ्रांस की मीडिया पार्ट की इस खबर में अक्टूबर 2018 में फ्रांस की पब्लिक प्रोसक्यूशन एजेंसी पीएनएफ को राफेल सौदे में अलर्ट मिला। उसी समय फ्रेंच कानून के अनुसार दसॉल्ट एविएशन का ऑडिट भी किया गया। इस ऑडिट में कंपनी के 2017 के खातों की जांच के दौरान क्लाइंट को गिफ्ट के नाम पर हुए 508925 यूरो के खर्च का खुलासा हुआ। यह राशि सामान्य रुप से इस मद में खर्च होने वाली राशि से काफी अधिक थी।

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पुराना बिल कराया उपलब्ध
खबर के मुताबिक इस खर्च पर स्पष्टीकरण मांगने पर दसॉल्ट एविएशन ने एएफए को 30 मार्च 2017 का बिल उपलब्ध कराया। यह भारत की कंपनी डेफसैस सॉल्यूशन की ओर से दिया गया था। यह बिल राफेल लड़ाकू विमान के 50 मॉडल बनाने के लिए दिए गए ऑर्डर में से 50 प्रतिशत काम के लिए था। इस काम के लिए प्रति राफेल 20.357 यूरो की राशि का बिल दिया गया था।

दसॉल्ट ने नहीं दी कोई नई जानकारी
अक्टूबर 2018 में इस खर्च के बारे में जानकारी मिलने के बाद एएफए ने दसॉल्ट से पूछा कि आखिर कंपनी ने अपने ही लड़ाकू विमान के मॉडल क्यों बनवाए और इसके लिए 20 हजार यूरो की बड़ी रकम क्यों खर्च की गई। साथ ही यह भी पूछा गया कि क्या एक छोटी कार के आकार के यह मॉ़ल कभी बनाए या कहीं लगाए भी गए? लेकिन दसॉल्ट की ओर से इस बारे में कोई नई जानकारी नहीं उपलब्ध कराई गई।

खास बातें

  • फ्रेंच भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी एएफए की जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा
  • दसॉल्ट एविएशन ने कुछ बोगस नजर आनेवाले भुगतान किए
  • कंपनी के 2017 के खातों में 5 लाख 8 हजार 924 यूरो (4.39 करोड़) क्लाइंट के गिफ्ट के नाम पर खर्च दर्शाए गए
  • इतनी बड़ी राशि को लेकर ठोस स्पष्टीकरण नहीं दिया गया
  • कंपनी ने मार्च 2017 का बिल ही उपलब्ध कराया
  • एएफए के पूछने पर दसॉल्ट ने बताया कि राफेल विमान के 50 मॉडल एक भारतीय कंपनी से बनवाए गए
  • इन मॉडल के लिए 20 हजार यूरो (17 लाख रुपए) प्रति मॉडल के हिसाब से भुगतान किए गए
  • ये मॉडल कहां और कैसे इस्तेमाल किए गए, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई
  • मॉडल बनाने का काम भारत की कंपनी डेफसेस सॉल्यूशंस को दिया गयाडेफसेस सॉल्यूशंस 
    यह कंपनी दसॉल्ट एविएशन की भारत की सब कॉन्ट्रैक्टर कंपनी है और इसका स्वामित्व रखने वाले परिवार से जुड़े सुषेण गुप्ता सुरक्षा सौदों के बिचौलिए रहे हैं और दसॉल्ट के एजेंट भी रहे हैं। सुषेण गुप्ता को 2019 में अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर खरीद घोटाले की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार भी किया था। मीडिया पार्ट के अनुसार गुप्ता ने ही दसॉल्ट एविएशन को मार्च 2017 में राफेल मॉडल बनने का बिल दिया था।

सर्वोच्च न्यायालय से हरी झंडी
बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय ने 14 मार्च 2019 को यह कहते हुए राफेल से संबंधित सभी तरह के आरोपों को खारिज कर दिया था कि इस मामले की जांच की जरुरत नहीं है। न्यायालय ने कहा था कि हमें नहीं लगता है कि लड़ाकू विमान सौदा मामले में किसी एफआईआर या जांच की जरुरत है। अदालत ने 14 दिसंबर 2018 को राफेल सौदे की प्रोसेस और सरकार के पार्टनर चयन में किसी भी तरह के पक्षपात के आरोपों को भी बेबुनियाद बताया था।

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