अबकी बुआ-भतीजा नहीं, ओम और अखिलेश… उत्तर प्रदेश में नया गठजोड़

उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनावों को देखते हुए राजनीतिक पार्टियों ने कमर कसनी शुरू कर दी है। इस बार राज्य में भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस का सीधा मुकाबला होगा।

उत्तर प्रदेश में बुआ को अब भतीजा फूटी आंख भी नहीं सुहाता। बुआ और भतीजा दोनों ही अपनी-अपनी पार्टियों के मुखिया हैं, इसके कारण इस चुनाव में दोनों एक दूसरे से मुकाबले को तैयार हैं। लेकिन सियासी संभावनाएं कहीं रुकती थोड़े ही हैं। माया बुआ साथ नहीं हैं तो भतीजे अखिलेश ने ओम प्रकाश राजभर से गठबंधन कर लिया।

उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के लिए सियासी गठबंधन और पाले बदलने शुरू हो गए हैं। पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को टक्कर देने के लिए साथ आए बुआ भतीजे में इस बार कट्टी हो गई है। इसके कारण बुआ मायावती की बहुजन समाज पार्टी और भतीजे अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी विधान सभा चुनाव में एक दूसरे का सामना करेंगे। इस चुनाव में अपने पाले को मजबूत करने के लिए अखिलेश यादव ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से गठबंधन कर लिया है।

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यहां राजभर निर्णायक
उत्तर प्रदेश में राजभर समाज का वोट लगभग 4 प्रतिशत है, इसका प्रभाव 117 सीटों पर है। इसमें पूर्वांचल के बीस से अधिक जिलों की सीटों पर राजभर समाज का वोट 18-20 प्रतिशत के लगभग है, जो निर्णायक प्रभाव डालता है। जिसमें वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, आजमगढ़, देवरिया, बलिया, मऊ का समावेश है। इसके अलावा अयोध्या, अंबेडकर नगर, गोरखपुर, संत कबीरनगर, कुशीनगर, बस्ती, बहराइच, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, महराजगंज और श्रावस्ती में कुल मतों का 10 प्रतिशत राजभर समाज का है।

भाजपा से टूटा गठबंधन
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर 2017 का विधान सभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर लड़े थे। इसमें भाजपा को लाभ हुआ और वह स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में आ गई, सभासपा को भी चार सीटें प्राप्त हुई थीं। परंतु, स्पष्ट बहुमत प्राप्त भाजपा ने छोटे साथियों पर उतना ध्यान नहीं दिया, जितने की अपेक्षा इन दलों को गठबंधन करने के समय थी और ओमप्रकाश राजभर का भाजपा से मोहभंग हो गया और वे सरकार से बाहर निकल गए।

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