सीबीआई जांच में दखल नहीं, अनिल देशमुख की याचिका खारिज

अनिल देशमुख को अपने ऊपर लगे आरोपों की जांच के आदेश के बाद त्यागपत्र देना पड़ा था। अब इस प्रकरण में एक और जटिलता आ गई है, जिसमें सचिन वाझे का तथाकथित पत्र सार्वजनिक हो गया है। जिसमें महाराष्ट्र सरकार का एक और मंत्री फंसता दिख रहा है। यदि इस पत्र का संज्ञान सर्वोच्च न्यायालय लेती है तो अनिल देशमुख की दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख की याचिका को सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने अनिल देशमुख के साथ महाराष्ट्र सरकारी की अर्जी को भी अस्वीकार कर दिया है। शीर्ष न्यायालय ने इस प्रकरण में दखल देने से इन्कार कर दिया है। इस प्रकरण के बाद अब ये स्पष्ट हो गया है कि अनिल देशमुख के विरुद्ध सीबीआई जांच चलती रहेगी। पूर्व मंत्री ने बॉम्बे उच्च न्यायालय के उस निर्णय को चुनौती दी थी जिसमें सौ करोड़ रुपए की धन उगाही करवाने के लिए अधिकारी को आदेश देने का आरोप है। इस प्रकरण में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने प्रारंभिक जांच (पीई) शुरू कर दी है। ये आरोप मुंबई पुलिस के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने लगाए हैं।

बता दें कि 20 मार्च को परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर गृह मंत्री अनिल देशमुख पर गंभीर आरोप लगए थे। उन्होंने पत्र में लिखा था कि गृह मंत्री ने मुंबई के पूर्व पुलिस निरीक्षक सचिन वाझे को हर महीने 100 करोड़ रुपए हफ्ता वसूली का टारगेट दिया था।

परमबीर के सबूत
परमबीर सिंह की वह वाट्सएप चैट, जो उन्होंने अपने मातहत काम करनेवाले पुलिस अधिकारियों से की थी, काफी महत्वपूर्ण हैं। तत्कालीन मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने अपने पत्र में वसूली का आरोप साबित करने के लिए सोशल सर्विस ब्रांच के सहायक पुलिस आयुक्त संजय पाटील के साथ हुई अपनी वाट्सएप चैट का ब्योरा दिया है।

ब्योरा इस तरह हैः

परमबीर सिंहः 16 मार्च, शाम 4.59 बजेः पाटील, फरवरी में जब आप गृह मंत्री सर और पलांडे से मिले थे तो उन्होंने कितने बार और प्रतिष्ठानों का जिक्र किया था। उन्हें कितनी रकम की उम्मीद है।
पाटीलः कोई जबाव नहीं..
परमबीर सिंहः 16 मार्च, शाम 5-00 बजेः जल्दी जबाव दें।
पाटीलः 16 मार्च, शाम 5.18 बजेः उन्होंने मुंबई में 1750 बार और प्रतिष्ठान बताए हैं। हर एक से तीन लाख रुपए वसूलने हैं। इस तरह हर महीने करीब 50 करोड़ का कलेक्शनन होगा।
पाटिलः 16 मार्च, शाम 5.23 बजेः यह बता पलांडे ने डीसीपी भुजबल के सामने 4 मार्च को बताई।
परमबीर सिंहः 16 मार्च, शाम 5.25 बजेः आप गृह मंत्री से कब मिले थे।
पाटिलः 16 मार्च, शाम 5.26 बजेः चार दिन पहले हुक्का बार को लेकर ब्रीफिंग के सिलसिले में।
परमबीर सिंहः 16 मार्च, शाम 5.27 बजेः और सचिन वाझे के साथ गृह मंत्री की मीटिंग कब हुई।
पाटीलः 16 मार्च, शाम 5.33 बजेः सर मुझे सही तारीख याद नहीं।
परमबीर सिंहः 16 मार्च, शाम 7.40 बजेः आपने कहा था कि आपकी मीटिंग से कुछ दिन पहले मुलाकात हुई थी।
पाटिलः 16 मार्च, शाम 8.30 बजा) जी सर. लेकिन यह फरवरी अंत की बात है।
परमबीर सिंहः 19 मार्च, शाम 8.02 बजेः मुझे कुछ और जानकारी चाहिए। गृह मंत्रीी से मुलाकात के बाद क्या वाझे आपसे मिला?
पाटीलः 19 मार्च, शाम, 8.53 बजेः जी सर, गृह मंत्री से मुलाकात के बाद वाझे मुझसे मिला था।
परमबीर सिंहः 19 मार्च, शाम 9.01 बजेः क्या उसने कुछ बताया कि गृह मंत्री ने उसे क्यों बुलाया था?
पाटीलः 19 मार्च, रात 9.12 बजेः उसने मुझे बताया था कि मुंबई के 1750 बार और रेस्टॉरंट हैं और प्रत्येक से तीन लाख की वसूली करनी है। जो हर महीने 40 करोड़ के आसपास होगी।
परमबीर सिंहः 19 मार्च, रात 9.13 बजेः ओह, यह तो वही बात है, जो आपसे भी की गई थी।
पाटीलः 19 मार्च, रात 9.15 बजेः जी, यही बात 4 मार्च को पलांडे ने मुझसे कही थी।
परमबीर सिंहः 19 मार्च, रात.9.16 बजेः अरे हां आप तो चार मार्च को पलांडे से मिले थे।
पाटीलः 19 मार्च रात 9.17 बजेः जी सर, मुझे बुलाया गया था।

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