उत्तर प्रदेश: राजनीतिक विस्फोट करने से पहले खुद ही घायल हो गए स्वामी प्रसाद, होगी गिरफ्तारी?

भाजपा सरकार के मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य भाजपा छोड़कर साइकिल की सवारी करने के लिए चर्चा में हैं। अब वे भाजपा में बड़ा राजनीतिक विस्फोट करने का दावा कर रहे हैं, यह दावा सही होता है या बड़बोली यह तो आनेवाला समय ही निश्चित करेगा, परंतु एक पुरानी बड़बोली स्वामी प्रसाद मौर्य को भारी पड़ गई है। अब उनके विरुद्ध न्यायालय ने गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया है।

स्वामी प्रसाद मौर्य उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। इस सरकार ने अपना कार्यकाल पूरा कर लिया है, और राज्य में चंद दिनों में ही विधान सभा चुनाव होने हैं। इस परिस्थिति में स्वामी प्रसाद मौर्य को अचानक प्रतीत होने लगा है कि भाजपा दलितों की उपेक्षा कर रही है, बस क्या था? स्वामी प्रसाद ने भाजपा को राम-राम कह दिया।

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पूर्व की बड़बोली पड़ी भारी
प्रतापगढ़ में जन्मे स्वामी प्रसाद मौर्य ने वर्ष 2014 में हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसमें उनके विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया था। जिसमें सुनवाई सुल्तानपुर के एमपी-एमएलए न्यायालय में चल रही थी। प्रकरण में स्वामी प्रसाद मौर्य के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट पहले ही जारी हो चुका था, परंतु उन्होंने उच्च न्यायालय से 2016 में स्टे प्राप्त कर लिया था। इस महीने की दिनांक 6 को सुल्तानपुर के विशेष न्यायालय ने स्वामी प्रसाद मौर्य को 12 जनवरी की अगली सुनवाई में प्रस्तुत होने का आदेश दिया था, परंतु वे प्रस्तुत नहीं हुए। जिसके पश्चात उनके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया गया है।

सपा के होंगे साथ?
स्वामी प्रसाद के भाजपा छोड़ने के साथ ही समाजवादी पार्टी ने उनका अपने यहां स्वागत किया है। परंतु, स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने निर्णयों के लिए आगामी 14-15 जनवरी तक प्रतीक्षा करने को कहा है। उनका दावा है कि, वे इस दिन भाजपा में बड़ा विस्फोट करेंगे। ऐसी आशा है कि स्वामी प्रसाद मौर्य समाजवादी पार्टी के साथ जा सकते हैं।

बसपा- भाजपा और अब किसके स्वामी?
स्वामी प्रसाद भारतीय जनता पार्टी में आने से पहले बहुजन समाज पार्टी के साथ थे। वे मायावती सरकार में मंत्री थे। परंतु, 2016 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी का साथ छोड़ दिया। वे कभी मायावती के खास लोगों में से माने जाते थे। परंतु, अचानक चुनावों के पहले मायावती पर टिकट बेचने का आरोप लगाते हुए उन्होंने हाथी का साथ छोड़ दिया और भाजपा के साथी बन गए। इसके लगभग छह वर्षों बाद स्वामी फिर चलता हुए हैं, भाजपा से बैर लेते हुए त्यागपत्र दे दिया है और अब किसके स्वामी बनेंगे ये मकर संक्रांति के बदलने पर ही बताएंगे।

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