इसलिए शिवसेना सांसद भावना गवली आई ‘ईडी’ के निशाने पर… प्रतिष्ठानों पर पड़ा छापा

शिवसेना के जनप्रतिनिधियों के आर्थिक व्यवहारों पर केंद्रीय जांच एजेंसियों की वक्र दृष्टि बनी हुई है। प्रवर्तन निदेशालय ने अब जांच की कमान संभाली है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने यवतमाल से शिवसेना सांसद के प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की है। एजेंसी ने उनके पांच ठिकानों पर छापा मारा है। उन पर सौ करोड़ रुपए के घपले में संलिप्तता का आरोप भाजपा ने लगाया था। इस कार्रवाई के साथ ही शिवसेना नेताओं पर लगातार दूसरे दिन प्रवर्तन निदेशालय कार्रवाई जारी है।

यवतमाल की सांसद भावना गवली के पांच प्रतिष्ठान जिसमें उत्कर्ष प्रतिष्ठान, बालाजी सहकारी पार्टिकल बोर्ड, बीएमएस कॉलेज, भावना एग्रो प्रोडक्ट सर्विस लिमिटेड पर प्रवर्तन निदेशालय ने कार्रवाई की है।

ये है प्रकरण

  • श्री बालाजी पार्टिकल बोर्ड के नाम से भावना गवली की एक कंपनी है। इस कंपनी के लिए राष्ट्रीय सहकारिता महामंडल ने 29 करोड़ रुपए, और राज्य सरकार ने 14 करोड़ रुपए का अनुदान दिया था। इस प्रकार भावना गवली को इस कंपनी के लिए 43 करोड़ रुपए का अनुदान सरकार से मिला था। आरोप है कि इसके बाद भी भावना गवली ने कंपनी नहीं शुरू की। इसके उलट कंपनी की 7 करोड़ रुपए के मूल्य पर बेच दिया गया।

  • भारतीय जनता पार्टी के नेता किरिट सोमैया ने उन पर बालाजी बार्टिकल बोर्ड कंपनी में 100 करोड़ रुपए का घपला करने का आरोप लगाया था। किरिट सोमैया ने प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के साथ ही मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सरकार के 11 नेताओं की सूची पर सोशल मीडिया पर साझा की है। जिसमें शीर्षक दिया है ठाकरे सरकार के ‘महान 11’
  • भावना गवली ने 12 मई 2020 को वाशिम पुलिस थाने में एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें 11 लोगों ने 7 जुलाई 2019 को सबेरे 5 बजे 7 करोड़ रुपए की नकदी कार्यालय से चुराने का आरोप लगाया गया है। इसको लेकर कई प्रश्न उठाए गए थे कि इतनी नकदी आई कहां से और जुलाई 2019 की चोरी की शिकायत एक वर्ष बाद मई 2020 में क्यों दर्ज कराई गई।

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