शिवसेना विवाद: ठाकरे गुट ने न्यायालय में दी ये दलील, फैसला सुरक्षित

निर्वाचन आयोग ने कहा था कि शिवसेना के दोनों गुटों में से कोई भी उपचुनाव में चुनाव चिह्न धनुष-बाण का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।

दिल्ली उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर चुनाव आयोग की ओर से लगाई गई रोक हटाने को लेकर उद्धव ठाकरे की अर्जी पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली बेंच ने 15 दिसंबर को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।

उद्धव ठाकरे ने सिंगल बेंच के फैसले को डिवीजन बेंच में चुनौती दी है। 15 नवंबर को हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने उद्धव ठाकरे की याचिका खारिज कर दी थी। जस्टिस संजीव नरुला की बेंच ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया था कि वो उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट के बीच चुनाव चिह्न का विवाद जल्द निपटाए।

उद्धव ठाकरे की ओर से आदेश के विरोध में कही ये बात
सिंगल बेंच में सुनवाई के दौरान उद्धव ठाकरे की ओर से निर्वाचन आयोग के आदेश का विरोध करते हुए कहा गया था कि उन्होंने 30 वर्ष तक शिवसेना चलाई है लेकिन आज अपने पिता के नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकता। उद्धव ठाकरे की ओर से कहा गया था कि निर्वाचन आयोग के आदेश का ठाकरे और उनके राजनीतिक दल पर गंभीर परिणाम पड़ा है। निर्वाचन आयोग का आदेश अवैध है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि ठाकरे के अधिकार और विवाद अभी भी खुले हैं, क्योंकि निर्वाचन आयोग ने अभी तक इस मसले पर अंतिम फैसला नहीं किया है। उपचुनाव के लिए केवल अंतरिम आदेश पारित किया था, जो अब समाप्त हो गया है।

ये है मामला
 निर्वाचन आयोग ने उप चुनाव के लिए एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे द्वारा शिवसेना के चुनाव चिह्न धनुष-बाण और पार्टी के नाम के उपयोग पर रोक लगा दी थी। 27 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने उद्धव गुट की याचिका को खारिज करते हुए पार्टी के चुनाव चिह्न को लेकर निर्वाचन आयोग की कार्रवाई पर रोक से इनकार कर दिया था। उसके बाद निर्वाचन आयोग ने 8 अक्टूबर को शिवसेना के चुनाव चिह्न को फ्रीज करने का आदेश दिया था।

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निर्वाचन आयोग ने कहा था कि शिवसेना के दोनों गुटों में से कोई भी उपचुनाव में चुनाव चिह्न धनुष-बाण का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। आयोग का ये आदेश मुंबई की अंधेरी ईस्ट विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए था। निर्वाचन आयोग के इसी आदेश को उद्धव गुट ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

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