राजस्थान भाजपा में ‘राजे’ का राज खत्म?

उपचुनावों में भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए कसौटी की घड़ी है। प्रदेश में सत्ताधारी कांग्रेस के लिए उसे कार्यों का प्रगतिपत्र होगा चुनाव परिणाम तो भाजपा के लिए केंद्र सरकार के कार्य और किसान आंदोलन की आंधी के बाद की प्रगति पुस्तक होगी।

देश के पांच राज्यों में हो रहे चुनावों के साथ कई राज्यों में उपचुनाव भी हो रहे हैं। इसमें राजस्थान की तीन विधानसभा सीटों का समावेश है। इसके लिए भाजपा के स्टार प्रचारकों की सूची से वसुंधरा राजे सिंधिया का नाम गायब है। वसुंधरा राजे राज्य की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। लेकिन अब इतने महत्वपूर्ण उपचुनाव में राजे का नाम न आना पार्टी में उनके राज के खत्म होने की निशानी मानी जा रही है।

प्रदेश की राजसमंद, सहाड़ा और सुजानगढ़ विधान सभा सीट पर चुनाव हैं। इन सीटों पर भारतीय जनता पार्टी अबकी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यों को आधार बनाकर चुनाव लड़नेवाली है। इसका एक कारण ये भी है कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है ऐसी स्थिति में भाजपा के पास मोदी वोट बैंक को पुन: प्रयोग में लाने के सिवाय दूसरा कोई पर्याय नहीं है। जबकि, दूसरा कारण वसुंधरा राजे के प्रभाव को भी कम करने का हो सकता है।

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ये हैं स्टार प्रचारक
राजस्थान विधान सभा के उपचुनावों के लिए स्टार प्रचारकों की सूची में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह, अर्जुन राम मेघवाल, कैलाश चौधरी और सतीश पुनिया, गुलाब कटारिया, राजेंद्र राठोड़ का नाम है। जबकि प्रदेश भाजपा की बड़ी नेता वसुंधरा राजे सिंधिया का नाम सूची से नदारद है।

इस मुद्दे पर स्पष्ट रूप से कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। लेकिन दबी जुबान ये कह रहे हैं कि वसुंधरा राजे सिंधिया अब राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और वे राष्ट्रीय स्तर के कार्यों में व्यस्त हैं।

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लग रहे आरोप
भाजपा का एक धड़ा अपनी पूर्व मुख्यमंत्री पर पार्टी के विरोध में कार्य करने का आरोप लगा रहा है। सूत्रों के अनुसार वसुंधरा राजे सिंधिया अपने समर्थकों को इन सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों के रूप में चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। वे अपने कट्टर समर्थक रणधीर सिंह भिंडर की जनता सेना के माध्यम से भी उम्मीदवारों को भाजपा के विरोध में उतार रही हैं।

भाजपा को है विश्वास
भारतीय जनता पार्टी को इन तीनों सीटों पर अपनी जीत का विश्वास है। एक नेता ने बताया कि स्थानीय नेताओं ने पचास प्रतिशत से अधिक निर्दलीय उम्मीदवारों को अपना नाम वापस लेने के लिए मना लिया है। जिसके कारण अब दो-तीन उम्मीदवार ही मैदान में हैं। भाजपा नेताओं को तीनों ही सीटों पर अपनी विजय का विश्वास है।

 

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