संत तुकाराम के अभंग से पूर्ण हुआ वीर सावरकर रचित ‘हिंदुत्व’

स्वातंत्र्यवीर सावरकर अध्ययशील व्यक्तित्व के थे। उनकी अध्ययशीलता के कारण ही भारतीय स्वातंत्र्य समर को जोसेफ मेजीनी का आत्मचरित्र, हिंदुत्व, 1857 का स्वातंत्र्य समर जैसे ऐतिहासिक ग्रंथ, छत्रपति शिवाजी महाराज की आरती, मातृ भूमि के लिए कविताएं मिल पाई।

देहू की धरती पर तुकाराम महाराज के अभंगों का गायन करते-करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीर सावरकर के कालापानी की सजा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि, कालापानी के कारागृह काल में स्वातंत्र्यवीर सावरकर संत तुकाराम के अभंग गाया करते थे। स्वातंत्र्यवीर सावरकर ने अपनी पुस्तक ‘हिंदुत्व’ का समापन संत तुकाराम के अभंग के साथ किया है।

संत तुकाराम के अभंगों का उल्लेख करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने उसके भावार्थ को वर्तमान सरकार के कार्यों से जोड़कर रेखांकित किया। स्वातंत्र्यवीर सावरकर द्वारा भोगी गई अतिवेदनादायी कालापानी की सजा काल का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि, वीर सावरकर उस काल में अंदमान जेल में संत तुकाराम महाराज के अभंगों को गाया करते थे। इसी को विस्तार देते हुए स्वातंत्र्यवीर सावरकर के पौत्र रणजीत सावरकर ने बताया कि, रत्नागिरी कारागृह में स्वातंत्र्यवीर सावरकर ने हिंदुत्व नामक ग्रंथ लिखा था।

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स्वातंत्र्यवीर सावरकर ने श्रीमद् भगवत् गीता, उपनिषद आदि का अध्ययन किया था। उन्होंने संत तुकाराम महाराज के अभंगों का भी पठन किया था। आध्यात्मिक विषयों के अध्ययन के कारण अतिकष्टदायी कालापानी की सजा भुगतते हुए भी स्वातंत्र्यवीर सावरकर का मनोबल ऊंचा रहा। रत्नागिरी कारागृह में बंदी रहते हुए वीर सावरकर ने ‘हिंदुत्व’ ग्रंथ की रचना की थी। इस ग्रंथ का समापन संत तुकाराम महाराज के अभंग से किया है।
रणजीत सावरकर – अध्यक्ष, स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक

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