नेपाल के प्रधानमंत्री फंसे जांच में, होंगे गिरफ्तार? एक स्वीकारोक्ति ने माओवादी सरकार को दिया सदमा

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के चलते मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास बालुवाटार में माओवादी पक्ष के 8 दलों ने एकमत होकर जवाब देने का निर्णय किया है। लंबे समय के बाद सशस्त्र जनयुद्ध का समर्थन करने वाले माओवादी एक साथ खड़े हुए होकर एक संयुक्त बयान जारी किया है।

Nepal PM SC

नेपाल के प्रधानमंत्री एवं सीपीएन (एमसी) के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है। मंगलवार को अधिवक्ता ज्ञानेंद्र अरण ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट दायर कर 10 साल पुराने संघर्ष के मामले में प्रधानमंत्री प्रचंड के खिलाफ आपराधिक आरोपों की जांच किये जाने और मुकदमा चलाने का आदेश देने की मांग की है। इसी तरह एक अन्य रिट याचिकाकर्ता कल्याण बुधाथोकी की रिट पंजीकरण प्रक्रिया में है।

सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने प्रचंड के खिलाफ 079–947 नंबर के तहत रिट दर्ज की है। इस पर सुप्रीम कोर्ट बुधवार को सुनवाई करेगा।

माना, पांच हजार जन-संहार का जिम्मेदार
प्रधानमंत्री प्रचंड ने 3 साल पहले काठमांडू में दिए एक बयान के कारण मुश्किल में पड़ गए हैं। 15 जनवरी, 2020 यानी माघी त्योहार के दिन प्रचंड ने विवादित बयान दिया था। प्रचंड ने एक सभा में नेपाल में संघर्ष के दौरान मारे गए लोगों में से केवल 5000 लोगों को मारने की जिम्मेदारी ली थी ।

याचिका दायर करने की मिली अनुमति
इस स्वीकारोक्ति को लेकर 3 साल पहले सर्वोच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दाखिल की गई थी। तब न्यायालय प्रशासन ने आदेश दिया था कि याचिका दर्ज नहीं की जा सकती है। उसके बाद याचिकाकर्ताओं ने फिर से सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की और सुनवाई करने की मांग की। शुक्रवार को कोर्ट ने याचिका दर्ज करने का आदेश दिया।

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माओवादियों की हिंसा में 17 हजार मौतें
प्रचंड के नेतृत्व में माओवादी सशस्त्र गतिविधियों के दौरान 17,000 से अधिक लोग मारे गए थे। नेपाल में संक्रमणकालीन न्याय अभी पूरा नहीं हुआ है। व्यापक शांति समझौते को 17 साल हो गए हैं। हालांकि संघर्ष के मुद्दों को हल करने के लिए विभिन्न आयोगों का गठन किया गया लेकिन काम आगे नहीं बढ़ा है। माओवादियों के शांतिपूर्ण राजनीति में आने के बाद उनकी मांगों के अनुसार नेपाल गणतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के साथ संघवाद में चला गया है।

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