राष्ट्रवादी से छिन जाएगी घड़ी! सर्वोच्च न्यायालय में वो छुपाना पड़ा भारी

सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ता ब्रिजेश सिंह ने अवमानना की याचिका दायर की थी। जिसमें राजनीतिक दलों द्वारा न्यायालय के आदेशों के उल्लंघन का मुद्दा उपस्थित किया गया था।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के समक्ष बड़ा संकट उठ खड़ा हुआ है। एक ओर बिहार चुनाव में विजय तो नहीं मिली लेकिन अब वहां के उम्मीदवारों के कारण घड़ी छिनने का संकट मंडरा रहा है। इस विषय में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय सुरक्षित रख लिया है।

सर्वोच्च न्यायालय ने उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि की जानकारी प्रकाशित करने का निर्देश दिया था। परंतु, राष्ट्रवादी कांग्रेस और माकपा ने इन आदेशों का उल्लंघन किया। जिसके कारण उस पर न्यायालय की अवमानना की याचिका दायर हुई थी। इस प्रकरण की सुनवाई के बीच चुनाव आयोग ने भी अपना पक्ष रखा।

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चुनाव आयोग ने कहा, उमेदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि की जानकारी छुपानेवाले दलों के चुनाव चिन्ह रद्द करें या उम्मीदवारों को बर्खास्त करें।

बिहार चुनाव का है मामला
13 फरवरी 2020 को सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि, चुनावों में खड़े उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि की जानकारी को सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करें। इस आदेश का पालन कुच दलों द्वारा नहीं किया गया। जिसके कारण न्यायालय में अवमानना की याचिका दायर की गई थी।

माफी मांगने से ही नहीं चलेगा
इस याचिका की सुनवाई में चुनाव आयोग के वकील विकास सिंह ने सूचित किया कि, बिहार चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने आपराधिक पृष्ठभूमि के 26 उम्मीदवारों को टिकट दिया था। इसके अलावा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने चार आपराधिक पृष्ठभूमि के उम्मीदवार खड़े किये थे। इस याचिका पर सुनवाई न्यायाधीश आरएफ नरीमन और न्यायाधीश बीआर गवई कर रहे थे। न्यायालय की अवमानना का मुद्दा गंभीर होता देख राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वकील ने तत्काल न्यायालय में माफी मांग ली। परंतु न्यायालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि, मात्र माफी मांगकर नहीं चलेगा, न्यायालय के आदेशों का पालन भी करना चाहिए। इस टिप्पणी और चुनाव आयोग की कड़ी शिफारिस के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी पर घड़ी का चुनाव चिन्ह खोने का संकट है।

 

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