किसानों से क्यों नहीं मिले महामहिम?… जानिये

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार ने एक बार फिर उन पर सख्त टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के इतिहास में मैंने आज तक ऐसा राज्यपाल नहीं देखा है।

महाविकास आघाड़ी सरकार और महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी के बीच पुरानी अदावत है। अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार ने एक बार फिर उन पर सख्त टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के इतिहास में मैंने आज तक ऐसा राज्यपाल नहीं देखा है। राज्यपाल के पास अभिनेत्री कंगना रनौत से मिलने का समय है, लेकिन हमारे किसान अन्नदाताओं से मिलने का समय नहीं है। हालांकि राज भवन की ओर से इस बारे में स्पष्टीकरण दिया गया है।

 पवार ने मुंबई के आजाद मैदान में अपने संबोधन में कहा कि शेतकरी कामगार मोर्चा के आयोजकों ने मुझे कहा था कि सभा के बाद किसानों की ओर से राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी को एक निवेदन देना है। लेकिन वे गोवा चले गए। अब ये निवेदन किसे देना है, कहां देना है, इस बारे में विचार करना होगा।

मोर्चे में शामिल हुए हजारों लोग
बता दें कि महाराष्ट्र के किसानों ने 25 जनवरी को आजाद मैदान में केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों के विरोध में मोर्चा निकाला। इस मोर्चे में शामिल होने के लिए राज्य भर से हजारों की संख्या में किसान आजाद मैदान में पहुंचे। पवार इस दौरान आयोजित सभा में किसानों को संबोधित कर रहे थे।

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‘पंजाब के किसान आतंकवादी हैं क्या?’
शरद पवार ने सरकार ने कहा कि दिल्ली में कृषि बिलों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसान पंजाब और हरियाणा के बताए जा रहे हैं। पंजाब के किसान का मतलब क्या? पंजाब के किसान क्या पाकिस्तानी हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए सबसे ज्यादा जान गंवाने पंजाब के किसान थे। पंजाब के किसानों ने कई बार जान की बाजी लगाकर लोगों की जानों की रक्षा की थी। आजादी के बाद भी पाकिस्तानी हमले के समय पंजाब के किसानों ने अपनी जान की बाजी लगाकर उनका मुकाबला किया। देश को अन्न देनेवाले अन्नदाता किसान हैं। लेकिन केंद्र सरकार नकरात्मक भूमिका निभा रही है। मैं ऐसे सरकार का बहिष्कार करता हूं।

‘लड़ाई सिर्फ किसानों की नहीं, सबकी है’
पवार ने कहा कि ये लड़ाई सिर्फ किसानों की नहीं, सबकी है। जिसके हाथ में सत्ता है, उसे किसानों के प्रति जरा भी प्रेम नहीं है। 60 दिनों से ज्यादा समय से किसान सड़कों पर बैठे हैं। लेकिन देश के प्रधानमंत्री ने उनकी सुध तक नहीं ली।
यह सरकार किसान विरोधी कानून लेकर आई। इससे किसानों का जीवन तबाह हो जाएगा। ऐसी सरकार को जनता तबाह किए बिना नहीं रहेगी। पवार ने कहा कि कानून रद्द करो और चर्चा करो, हम चर्चा करने के लिए तैयार हैं।

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क्यों नही मिले महामहिम?
राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के पास गोवा का भी अतिरिक्त प्रभार है। उन्हें 25 जनवरी को राज्य के विधानसभा के प्रथम सत्र को संबोधित करना था। इसलिए वे 25 जनवरी को किसानों के प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिल पाए। इस बारे में राज भवन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था। राज भवन की ओर से संयुक्त शेतकरी मोर्चा के धनंजय शिंदे को 22 जनवरी को फोन पर, जबकि निमंत्रक प्रकाश रेड्डी को 24 जनवरी को लिखित में इस बारे मे जानकारी दी गई थी।

राज्यपाल के प्रधान सचिव संतोष कुमार ने राज्यपाल पर लगाए जा रहे आरोप को गलत बताया है।

 

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