मुंबईः बहुचर्चित रेलवे हैंकॉक पुल का काम कांग्रेस ने ऐसे रोका!

काफी समय से बंद पड़े दक्षिण मुंबई के बहुचर्चित हैंकॉक पुल के रेलवे ट्रैक पर दूसरा गर्डर बिछाने का काम 6 जून को पूरा हो गया। इसमें देर होने का कराण यह है कि इसे लेकर मुंबई के पालक मंत्री असलम शेख ने आपत्ति जताई है।

दक्षिण मुंबई के बहुचर्चित हैंकॉक पुल के रेलवे ट्रैक पर दूसरा गर्डर बिछाने का काम 6 जून को पूरा हो गया। कई वर्षों से ठप पड़े इस पुल का काम मार्च 2021 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन इस पर दूसरा गर्डर जून में बिछाया गया है। इसमें देर होने का कराण यह है कि इसे लेकर मुंबई के पालक मंत्री असलम शेख ने आपत्ति जताई है।

असलम शेख का कहना है कि इससे आसपास की इमारतों को नुकसान पहुंच सकता है। लेकिन पालक मंत्री की आपत्ति के बावजूद पुल विभाग ने गर्डर बिछा दिया है। इसके बावजूद कांग्रेस के मंत्री डिजाइन में बदलाव करने की बात कर पुल के निर्माण में बाधा डालने का काम कर रहे हैं।

77 करोड़ रुपये का ठेका
मुंबई महानगरपालिका बी विभाग के मझगांव में शिवदास चापसी रोड पर बने हैंकॉक ब्रिज को रेलवे ने जर्जर और खतरनाक होने के चलते ध्वस्त कर दिया था। इसके बाद बीएमसी द्वारा इसके निर्माण के लिए एक ठेकेदार नियुक्त किया गया था। हालांकि, न्यायालय के आदेश के अनुसार अनुबंध रद्द कर दिया गया था क्योंकि ठेकेदार की कंपनी काली सूची में थी। इसके बाद बीएमसी ने 19 फरवरी 2018 को 19 महीने में इस पुल के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए नया टेंडर निकाला और और इस प्रक्रिया में साई प्रोजेक्ट्स (मुंबई) प्राइवेट लिमिटेड को आमंत्रित किया। इसके बाद कंपनी को विभिन्न करों के साथ 51 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया। लेकिन रेलवे अथॉरिटी ने आइआइटी की गाइडलाइंस में गर्डर्स के डिजाइन को आईएस कोड के मुताबिक बदलने का सुझाव दिया। उसके बाद पुल की अनुबंध लागत में 25.71 करोड़ रुपये की वृद्धि हो गई, जिससे कुल अनुबंध लागत 77 करोड़ रुपए का हो गया।

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इसलिए रुका था काम
इस पुल की रेलवे लाइन पर पहला गर्डर डालने का काम पिछले साल किया गया था। लेकिन रेलवे और बीएमसी के बीच समझौता पत्र नहीं होने के कारण काम ठप हो गया था। उसके बाद, पुल विभाग के अधिकारी कानूनी अधिकारियों की मदद से मसौदा समझौते को अंतिम रूप देने के लिए दौड़न लगे थे। इसके बाद रेलवे लाइन पर पहला गर्डर बिछाया गया।

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क्या चाहती है कांग्रेस?
दूसरा गर्डर 6 जून को बिछाया गया है। इसके लिए रेलवे का मेगाब्लॉक किया गया था। हालांकि शहर के पालक मंत्री असलम शेख और विधायक अमीन पटेल ने गर्डर बिछाने पर आपत्ति जताई। लेकिन पुल विभाग के अधिकारियों ने 6 जून की देर रात तक दूसरा गर्डर बिछाने का काम पूरा कर लिया क्योंकि मेगाब्लॉक को रद्द करने पर 20 करोड़ रुपये का नुकसान होता। बताया जा रहा है कि इस गर्डर के कारण पुल का रास्ता इमारतों के करीब से गुजरने की वजह से पालक मंत्री ने इस पर आपत्ति जताई थी। हालांकि इसके पीछे राजनीतिक कारण भी बताया जा रहा है।

परिवहन के लिए जल्द ही खुलेगा पुल
कहा जा रहा है कि पालक मंत्री ने इस बारे में चर्चा करने के लिए पुल विभाग के सभी अधिकारियों को अपने बंगले पर बुलाया है। उन्होंने इसके लिए स्थानीय जनप्रतिनिधि और पूर्व पार्षद मनोज जमसूतकर से भी संपर्क किया है। इसके बावजूद अधिकारियों ने बताया कि काम पूरा होने के बाद इसे जल्द ही खोल दिया जाएगा।

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