महाराष्ट्रः शिवसेना के स्थापना दिवस पर क्या बोलेंगे उद्धव ठकरे?

महाराष्ट्र के विधान भवन पर दूसरी बार भगवा फहराये जाने के बाद शिवसेना की यह दूसरी वर्षगांठ है। कोरोना संकट और लॉकडाउन की पृष्ठभूमि में पार्टी की वर्षगांठ सादगी से मनाए जाने की घोषणा की गई है।

मराठी मानुस को न्याय दिलाने और उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए महाराष्ट्र की आज की बड़ी राजनैतिक पार्टी शिवसेना की स्थापना 55 वर्ष पहले की गई थी। 19 जून को इसके 55 साल पूरे हो रहे हैं। इस अवसर पर अब तक पिछले साल को छोड़कर हर साल पार्टी भव्य तरीके से इसकी वर्षगांठ मनाती रही है, लेकिन इस वर्ष भी पिछले साल की तरह ही कोरोना की लहर का कहर जारी है। इस कारण पिछले साल की तरह इस साल भी पार्टी का स्थापना दिवस सादगी से मनाए जाने की घोषणा की गई है।

बता दें कि वर्ष 2020 में भी पूरे देश के साथ महाराष्ट्र में भी कोरोना संक्रमण फैला हुआ था। इस कारण शिवसेना का स्थापना दिवस बहुत सादगी से मनाया गया था। पार्टी के कार्याध्क्ष उद्धव ठाकरे ने वर्चुअली शिवसैनिकों को संबोधित किया था। इस वर्ष भी पार्टी द्वारा इसका स्थापना दिवस सादगी से और वर्चुअली मनाने की घोषणा की गई है।

ऐसे करेंगे शिवसैनिकों का मार्गदर्शन
महाराष्ट्र के विधान भवन पर दूसरी बार भगवा फहराये जाने के बाद से शिवसेना की यह दूसरी वर्षगांठ है। कोरोना संकट और लॉकडाउन की पृष्ठभूमि में इस बार भी वर्षगांठ सादगी से मनाए जाने की घोषणा की गई है। शिवसेना कार्याध्यक्ष और राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे 19 जून को शाम 7 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शिवसैनिकों का मार्गदर्शन करेंगे।

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इन मुद्दों पर कर सकते हैं बात
पता चला है कि मुख्यमंत्री शिवसेना और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच सेना भवन पर हुई झड़प को लेकर भी बात करेंगे। 15 जून को घटी इस घटना के बाद उद्धव ठाकरे ने शिवसेना भवन के सामने झड़प में शामिल अपने शिवसैनिकों की काफी तारीफ की थी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री राम मंदिर के मुद्दे पर भी टिप्पणी कर सकते हैं।

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भाजपा को दे सकते हैं जवाब
मुंबई महानगरपालिका चुनाव में अब कुछ ही महीने बाकी हैं। ऐसे में भाजपा ने शिवसेना के खिलाफ आक्रामक रुख अपना लिया है। क्या उद्धव ठाकरे भाजपा को जवाब देंगे ? इस बारे में राजनैतिक हलकों में चर्चा है। बता दें कि पिछले 50 वर्षों से राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रही कांग्रेस के साथ शिवसेना ने गठबंधन किया है। इस कारण महाराष्ट्र का पूरा राजनैतिक समीकरण बिगड़ गया है।

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