महाराष्ट्र: कोविड 19 प्रतिबंध अभी भी लागू… मंत्री जी का निर्णय घंटे भर में फेल

कोरोना संसर्ग के देखते हुए राज्य में प्रतंबिध लागू हैं। कई जिले इससे बहुत प्रभावित हुए हैं। सिंधुदुर्ग में बाहरियों के प्रवेश पर बंदी लगा दी गई है।

महाराष्ट्र में पांच प्रतिशत कोविड 19 पॉजिटिविटी रेट और ऑक्सीजन सपोर्ट पर कुल क्षमता का 25 प्रतिशत से कम संक्रमित होने पर जिले को अनलॉक करने की घोषणा की गई थी। यह घोषणा विजय वडेट्टीवार ने की थी, लेकिन इसके एक घंटे बाद ही प्रशासन ने जानकारी दी कि राज्य में प्रतिबंध अभी नहीं हटाए गए हैं और इस संबंध में प्रस्ताव अभी विचाराधीन है। इसके कारण जनता में संभ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसके साथ ही अब कांग्रेसी मंत्री के निर्णय को किसने बदला इस पर भी चर्चा होने लगी है।

राज्य में सत्ताधारी महाविकास आघाड़ी सरकार के मंत्री कमरे में कुछ निर्णय लेते हैं और बाहर कुछ और… इसका एक जीता जागता उदाहरण है विजय वडेट्टीवार की घोषणा। 3 मई 2021 को दोपहर 3 बजे राज्य के मदद व पुनर्वसन मंत्री विजय वडेट्टीवार घोषित करते हैं के आपदा प्रबंधन व पुनर्वसन विभाग के अनुरूप अनलॉक प्रक्रिया को पांच भागों में बांटा गया है। इसमें पहले भाग में वे शहर हैं जहां पांच प्रतिशत कोविड 19 पॉजिटिविटी रेट और ऑक्सीजन सपोर्ट पर कुल क्षमता का 25 प्रतिशत से कम संक्रमित हैं। इसे देखते हुए 18 जिलों को शुक्रवार 4 जून से अनलॉक करने की घोषणा कर दी।

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प्रशासन ने कहा प्रस्ताव विचाराधीन 
कोरोना का संक्रमण अभी कई ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रहा है। कोविड 19 के बदलते स्वरूपों को देखते हुए प्रतंबिधों में शिथिलता घोषित करने के पहले विचार करना आवश्यक है। राज्य सरकार ने अभी भी प्रतंबिध समाप्त नहीं किया है। ब्रेक दी चेन के अंतर्गत मात्र प्रतंबिधों को परिस्थितियों के अनुसार शिथिल करने की शुरुआत की गई है। इसके लिए आपत्ति व्यवस्थापन विभाग ने पांच चरण निर्धारित किये हैं। जिसके लिए साप्ताहिक कोविड 19 पॉजिटिविटी दर, ऑक्सीजन सपोर्ट पर मरीजों की संख्या को देखकर निर्णय किया जाएगा।

क्या सत्ता में संघर्ष है?
गुरुवार को हुई घटना सत्ता में संघर्ष की कहानी कह रही है। मदद व पुनर्वसन मंत्री अगले दिन से प्रथम चरण के अंतर्गत आए जिलों में प्रतिबंध समाप्ति की घोषणा करते हैं और एक घंटे बाद ही प्रशासन की ओर से प्रतंबिध लागू रहने की पुष्टि की जाती है। इस संबंध में प्रस्ताव प्रलंबित रहने की जानकारी मुख्यमंत्री के सचिवालय से मिलती है। इसको लेकर जनता में संभ्रम होना स्वाभाविक है, लेकिन इसके साथ ही यह भी प्रश्न खड़ा होता है कि क्या महाविकास आघाड़ी में सत्ता संघर्ष है?

 

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