मराठा आरक्षण के मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार चली अब यह चाल!

मराठा आरक्षण के मुद्दे पर राज्य सरकार में हलचल है। सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना सरकार द्वारा मराठा समाज को दिये गए आरक्षण को रद्द कर दिया है।

मराठा आरक्षण के मुद्दे पर राज्य सरकार ने अब पत्रबाजी की राह अपना ली है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मराठा आरक्षण को रद्द किये जाने के पश्चात राज्य सरकार ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से भेंट करके उनसे विनंती करने की बात कही थी। इसकी शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महाविकास आघाड़ी के नेताओं का एक दल राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिला।

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राज्यपाल से भेंट के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा है कि,

हम जल्द ही प्रधानमंत्री से मिलेंगे। महाराष्ट्र विधान सभा ने एकमत से निर्णय लिया था। परंतु, उसका विरोध हो गया। अब जो निर्णय हुआ है वह जनता का है। समाज को न्याय मिलना चाहिए। जैसे आज राज्यपाल को पत्र दिया वैसे ही प्रधानमंत्री को भी मिलकर पत्र देंगे। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुरूप पहली सीढ़ी के रूप में राज्यपाल से भेंट की है। हमने कहा था, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से विनंती करेंगे, वह हमने राज्यपाल के माध्यम से कर दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि, मराठा समाज ने हमेशा समझदारी दिखाया है। उन्हें पता है यह लड़ाई सरकार के विरोध में नहीं है, सरकार के साथ है। इस समाज की मांग के विरोध में कोई दल नहीं है। सरकार मराठा समाज के साथ है।

हलचल क्यों?
मराठा आरक्षण को लेकर राज्य सरकार में हलचल है। मराठा समाज वर्तमान में शांत है लेकिन उसके नेताओं ने अपने अधिकारों के लिए कमर कसनी शुरू कर दी है। यदि यह समाज सड़क पर उतरता है तो पिछली बार से बड़ा आंदोलन हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह राज्य सरकार के लिए सबसे बड़ी नाकामी सिद्ध होगी।

राज्य में गठबंधन सरकार है। यद्यपि वर्तमान में सरकार के घटक दलों में ऑल इज वेल की भूमिका है लेकिन हल्की सी अनबन चुनावों में धकेलने के लिए पर्याप्त है। ऐसी स्थिति में सरकार के तीनों ही घटक दलों को मराठा समाज का कोपभाजन झेलना पड़ सकता है।

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दो दल आंदोलित
सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना सरकार के दो घटक दल मराठा आरक्षण के मुद्दे पर सड़कों पर उतरने की तैयारी में है। इसमें सदाभाऊ खोत की रयत क्रांति और शिवसंग्राम सेना के विनायकराव मेटे का दल सम्मिलित है। इस संबंध में दोनों दलों ने अपना अगला कदम भी प्रकट कर दिया है।

सदाभाऊ खोत की रयत क्रांति ने कहा है कि उनकी पार्टी राज्यस्तरीय आंदोलन करने की शुरुआत कर दी है। यह आंदोलन आगामी काल में तीव्र होता जाएगा। तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ी ही कठिनाई से मराठा समाज को आरक्षण दिया था। परंतु, महाविकास आघाड़ी सरकार ने मिट्टी में मिला दिया। अब जब तक मराठा आरक्षण नहीं मिलेगा रयत क्रांति शांति से नहीं बैठेगी।

विनायक राव मेटे की शिवसंग्राम सेना भी आक्रामक है। उन्होंने शुरू में ही कह दिया था कि मराठा आरक्षण के मुद्दे को हल करने में मिली असफलता के बाद उपसमिति के अध्यक्ष अशोक चव्हाण को पद छोड़ देना चाहिए। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी मराठा आरक्षण का मुद्दा गंभीरता से नहीं लिया। इसलिए राज्य प्रमुख के रूप में उन्हें भी त्यागपत्र देना चाहिए।

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