महाराष्ट्रः मुख्यमंत्री को अपने मंत्रियों पर भरोसा नहीं है क्या ?

महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी सरकार में तीन पार्टियों के नेता मंत्री हैं। ऐसे में यहां कोई किसी को सुनने के लिए तैयार नहीं है। मुख्यमंत्री के आदेश को वे मानने के लिए बाध्य नहीं है।

महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी सरकार को सत्ता में आए लगभग डेढ़ साल हो चुके हैं। उद्धव ठाकरे इस सरकार के मुखिया हैं। लेकिन मुख्यमंत्री ठाकरे अपने मंत्रियों पर भरोसा क्यों नहीं करते? ऐसा इसलिए क्योंकि मंत्रियों को हर हफ्ते कैबिनेट में लिए जाने वाले फैसलों की जानकारी ऐन मौके पर दी जाती है। इसलिए, ठाकरे सरकार में मंत्री अब पूछ रहे हैं कि मंत्रियों को वो सब क्यों नहीं पता होता है, जो अधिकारी पहले से जानते हैं।

राज्य मंत्रिमंडल की हर सप्ताह बैठक होती है। कैबिनेट की इस बैठक में कई निर्णय लिए जाते हैं। निर्णय लेने से पहले कैबिनेट की बैठक में उन मुद्दों पर चर्चा होती है। इससे पहले मंत्रियों को कैबिनेट में लिए जाने वाले फैसलों के बारे में पहले ही जानकारी दी जाती थी। आघाड़ी सरकार के कार्यकाल में एक दिन पहले मंत्रियों को नोट दिया जाता था।

फडणवीस सरकार ने किया बदलाव
राज्य में आई फडणवीस सरकार ने भी कुछ दिनों तक उसी तरह कैबिनेट को चलाया। लेकिन अब मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की सरकार ने इस नियम में बदलाव किया है। पहले निर्धारित दिन पर कैबिनेट की बैठक होती थी। लेकिन, अब ऐसी स्थिति बन गई है कि बैठक कभी बुधवार तो कभी गुरुवार को होती है। इतना ही नहीं, ठाकरे सरकार में मंत्रियों को भी नहीं पता होता कि हफ्ते में कैबिनेट की बैठक कब होगी। कुछ मंत्रियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें कैबिनेट बैठक से कुछ घंटे पहले निर्णय के बारे में जानकारी दी जाती है। उनका कहना है कि कैबिनेट का एजेंडा मंत्रियों के पास एक दिन पहले आ जाना चाहिए।

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एजेंडा क्यों नहीं मिलता?
ठाकरे सरकार के कुछ मंत्री और अधिकारी एजेंडा को लेकर कुछ ज्यादा ही उत्साहित रहते हैं। वे मीडिया को पहले ही कैबिनेट की बैठक में लिए जाने वाले निर्णयों के बारे में जानकारी दे देते हैं। जबकि कैबिनेट के महत्वपूर्ण निर्णय बैठक समाप्त होने से पहले मीडिया में नहीं आने चाहिए। महत्वपूर्ण बात यह है कि चूंकि कैबिनेट निर्णय के नोट ऐन बैठक से पहले मंत्रियों के हाथ में आते हैं, इसलिए उनके पास इसे लीक करने का समय नहीं होता है।

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अजित पवार भी थे नाराज
राज्य सरकार की ओर से लिए गए निर्णयों में उपमुख्यमंत्री अजित पवार की भी उपेक्षा किए जाने की बात सामने आई थी। इससे नाराज पवार ने मुख्यमंत्री के अधीन आने वाले सामान्य प्रशासन विभाग को पत्र लिखा था। अजित पवार ने मुख्यमंत्री को सरकारी प्रस्ताव, अधिसूचनाएं, सर्कुलर आदि भेजने से पहले उनको विश्वास में नहीं लेने पर नाराजगी जताई थी। पवार ने मांग की थी कि मुख्यमंत्री को ज्ञात आधिकारिक पत्राचार की जानकारी उपमुख्यमंत्री कार्यालय को भी दी जाए। उसके बाद, जीएडी ने 3 जून को एक सरकारी प्रस्ताव जारी कर महाराष्ट्र सरकार के सभी विभागों को अपने प्रस्ताव, परिपत्र और अधिसूचनाएं उपमुख्यमंत्री कार्यालय को भी भेजने का निर्देश दिया।

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