लेटर बम: वाझे के उस ‘खत’ में है किस मंत्री की ‘खता’… जानें अंदर की बात

मुंबई में पब्लिक डोमेन में एक पत्र बुधवार की दोपहर से घूम रहा था। लेकिन उस पर आधिकारिक रूप से किसी ने कोई जानकारी नहीं दी है। कहा जा रहा है कि वह पत्र सचिन वाझे का है लेकिन प्रश्न उठता है कि जब वो एनआईए की हिरासत में है तो पत्र बाहर आया कैसे?

महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख अड़तालिस घंटे पहले ही मुंबई से सर्वोच्च न्यायालय पहुंचे थे। वे वहां बॉम्बे उच्च न्यायालय के उस निर्णय को चुनौती देने गए थे जिसमें सौ करोड़ की धन उगाही के प्रकरण में उनकी सीबीआई जांच का आदेश दिया गया है। इस प्रकरण में याचिका दायर होने के चौबीस घंटे के भीतर ही एक और लेटर बम सामने आया। इस लेटर बम का फटना अभी बाकी है। लेकिन उद्धव ठाकरे सरकार के एक हैवीवेट मंत्री ने पहले ही अपना नार्को टेस्ट कराने की मांग कर ली है। इस बीच मंत्री जी जिस पत्र पर सफाई दे रहे थे वो पब्लिक डोमेन में घूम रहा था उसमें जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार आरोप गंभीर हैं।

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  • 6 जून, 2020 में नौकरी में वापस आने के बाद कुछ लोगों ने आंदोलन किया था। इसके बाद गृह मंत्री अनिल देशमुख ने मुझे बताया कि शरद पवार ने आदेश दिया कि मुझे फिर निलंबित किया जाए।
  • गृह मंत्री ने शरद पवार को मनाने का आश्वासन दिया लेकिन इसके बदले में दो करोड़ रुपए की मांग की। मैंने इतना पैसा देने में असर्थता जताई तो उन्होंने कहा कि इसे भविष्य में कभी दे दूं।
  • जुलाई/अगस्त 2020 में मंत्री अनिल परब ने अपने सरकारी निवास स्थान पर बुलाया। इसमें मंत्री जी ने SBUT के प्रकरण को देखने को कहा जिसमें कि प्राथमिक जांच की जानी थी। उन्होंने मुझसे उसके ट्रस्टियों को उनके पास लाने को कहा। इसके अलावा मुझे उसके ट्रस्टियों से बात करके 50 करोड़ रुपए लेने को कहा। मैंने इस प्रकार के किसी कार्य को करने में असमर्थता व्यक्त की क्योंकि मैं SBUT के किसी को नहीं जानता था।
  • जनवरी 2021 में परब साहब ने फिर मुझे अपने सरकारी निवास पर बुलाया। उन्होंने मुझसे बीएमसी के घपले बाज ठेकेदारों की जांच करने को कहा। उन्होंने मुझसे ऐसे 50 ठेकेदारों से दो करोड़ रुपए जमा करने को कहा। यह जांच एक बेनामी पत्र पर की जा रही है।

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  • जनवरी 2021 में मुझे गृह मंत्री ने अपने बंगले ज्ञानेश्वरी में मुझे बुलाया। उस समय वहां उनका सचिव कुंदन भी मौजूद था। उन्होंने बताया कि मुंबई में लगभग 1,650 बार और रेस्टॉरेंट हैं। उनमें से प्रत्येक से मुझे 3 से 3.5 लाख रुपए जमा करने को कहा।

    मैंने उन्हें बताया कि मात्र 200 बार और रेस्टॉरेंट हैं न कि 1,650। मैंने गृह मंत्री को बोल दिया कि मैं ये कलेक्शन नहीं कर पाउंगा। उनके चेंबर से बाहर निकलते ही उनके पीए कुंदन ने मुझे सलाह दी कि मुझे गृह मंत्री के आदेश को मानना चाहिए, यदि मैं अपने पद और नौकरी को सही सलामत रखना चाहता हूं।

  • इस भेंट के बाद मैंने यह बात सम्माननीय पुलिस आयुक्त को बताई। मैंने ये आशंका भी जताई कि निकट भविष्य में मुझे कभी भी झूठे मामले फंसाया जा सकता है। पुलिस आयुक्त सर ने मुझे प्रोत्साहित किया और स्पष्ट रूप से आदेश दिया कि किसी के लिये भी इस प्रकार के किसी भी अवैध धन उगाही में न शामिल होऊं।

जिसे सचिन वाझे का पत्र बताया जा रहा है यदि वो सच निकला तो उद्धव ठाकरे सरकार का एक और मंत्री कार कांड से बेकार होने की राह पर आ जाएगा। यह प्रकरण मुकेश अंबानी के घर के पास मिली कार से शुरू हुआ था और पहुंच गया गृह मंत्री के पद त्याग तक। जबकि इस तथाकथित पत्र के आरोप भी पूर्व पुलिस आयुक्त के आरोपवाले पत्र से मेल खा रहे हैं। ऐसे में चित भी परमबीर की और पट में भी परम बीर से इन्कार नहीं किया जा सकता।

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