जन अधिकार पार्टी को न्यायालय के निर्णय का आसरा

जन अधिकार पार्टी का जनसमर्थन बैलट बॉक्स में नहीं दिखा, लेकिन पिछले कुछ महीनों में उसने अपनी लोकप्रियता में तेजी से विकास किया है। इसका कारण है कि जाप नेता अब स्थानीय लोगों की दिक्कतों को हल करने के लिए प्रशासन से भिड़ रहे हैं।

जन अधिकार पार्टी सुप्रीमो राजीव रंजन उर्फ पप्पू यादव की गिरफ्तारी को चार महीने हो गए हैं। उन्हें 32 वर्ष पुराने प्रकरण में गिरफ्तार किया गया है। इस दौरान मधेपुरा में उन्हें पेशी के लिये लाया गया था। जहां न्यायालय ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। जनअधिकार पार्टी को अपने नेता की रिहाई के लिए अब न्यायालय के निर्णय का सहारा जो 30 सितंबर की सुनवाई में आ सकता है।

पप्पू यादव वर्तमान समय में डीएमसीएच अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी के प्रकरण में न्यायालय ने 30 सितंबर की अगली तारीख दी है। जाप नेताओं ने पिछले कुछ समय से राज्य में विकास के सरकारी दावों का पोल खोल शुरू किया है। इसमें सरकारी एंम्बुलेंस, सरकारी पक्ष के नेताओं के दावे, कारखानों की खस्ताहाल परिस्थिति, सड़क और पुल की सच्चाई को सामने लाने का कार्य शामिल है।

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इकलौता दल निभा रहा विपक्ष की भूमिका

हम न्यायालय के निर्णय का स्वागत करेंगे। हमें न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है, जल्द ही यह हमारे पक्ष में आएगा। जन अधिकारी पार्टी एकमात्र ऐसा दल है जो बिहार में विपक्ष की भूमिका का निर्वहन कर रहा है। जाप हर मुद्दे पर सरकार और समाज के सामने सच्चाई ला रहा है। इसी कारण हमें षड्यंत्र का शिकार बनाया जा रहा है। पार्टी सुप्रीमो पप्पू यादव की गिरफ्तारी से किसे लाभ होनेवाला है ये राज्य की जनता के सामने है, जिसका उत्तर जनता शीघ्र ही देगी।
जेडी यादव – महासचिव, जन अधिकारी पार्टी युवा

ये है प्रकरण
11 मई, 2021 को जाप (जन अधिकार पार्टी) सुप्रीमो पप्पू यादव को कोविड-19 दिशानिर्देशों के उल्लंघन के प्रकरण में बुद्धा कॉलोनी पुलिस ने गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद मधेपुरा पुलिस ने उन्हें 32 वर्ष पुराने अपहरण के एक मामले में गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद पप्पू यादव को मधेपुरा ले जाया गया, जहां से सुपौल की वीरपुर जेल भेज दिया गया।

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