क्यों रोईं महिला पहलवान बबीता फोगाट?

किसानों के उग्र विरोध के कारण महिला पहलवान और भाजपा नेता बबीता फोगाट काफी आहत दिखीं और बात करते-करते उनकी आंखों में आंसू छलक आए।

अंतर्राष्ट्रीय महिला पहलवान बबीता फोगाट केंद्र के तीनों कृषि कानूनों के विरोध में छह महीनों से ज्यादा समय से प्रदर्शन कर रहे चंद किसान संगठनों को लेकर अपना दुख प्रकट किया है। उन्होंने आंदलनकारी किसानों को राजनीति से दूर रहने की सलाह दी है। 30 मई को हरियाणा स्थित अपने गांव दादरी में प्रवेश के दौरान उन्हें किसानों के विरोध का सामना करना पड़ा था। बबीता अपने बेटे के साथ अपने गांव पहुंची थीं। इस दौरान आंदोलनकारियों ने उनका विरोध किया था और उनकी गाड़ी पर डंडे से प्रहार किए थे।

किसानों के उग्र विरोध के कारण बबीता फोगाट काफी आहत दिखीं और बात करते-करते उनकी आंखों में आंसू छलक आए। बबीता ने कहा,’किसान इस तरह की हरकत नहीं कर सकते। ये विपक्षियों की शह पर किया जा रहा है। किसान होते तो बातचीत का रास्ता बंद नहीं करते और इस तरह की जिद नहीं करते।’

किसानों को सलाह
भारतीय जनता पार्टी की नेता बबीता ने कहा कि कृषि आंदोलनकारियों को अपनी हठ छोड़कर बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। कानून की खामियों को बताकर उन्हें दूर करने का प्रस्ताव देना चाहिए।

भावुक हो गईं बबीता
आंदोलनकारी किसानों की हरकत से आहत बबीता पत्रकारों से बात करते समय भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, ‘जब मैंने मेडल जीते थे तो किसी एक क्षेत्र या समाज के लिए नहीं जीते थे। आज मेरी गाड़ी पर डंडे बरसाए जा रहे हैं, गालियां दी जा रही हैं, किसान वास्तव में ऐसी हरकत नहीं कर सकते।’

ये है मामला
बता दें कि 30 अगस्त को उनके गांव जाते समय आंदलनकारी किसानों ने उनका उग्र विरोध किया था। भाजपा नेता और हरियाणा महिला विकास निगन की चेयरमैन बबीता के विरोध में कथित किसानों ने काले झंडे दिखाए थे और वे सड़क पर लेट गए थे। इस कारण उन्हें अपना कार्क्रम रद्द करना पड़ा था। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। बबीता फोगट केंद्र सरकार के सात साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रही थीं।

2019 में भाजपा में शामिल

  • बबीता 2019 में भाजपा में शामिल हुई थीं।
  • उन्होंने विधानसभा चुनाव भी लड़ा था, लेकिन हार गई थीं।
  • वे कुश्ती में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीत चुकी हैं।

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