यूएन की बैठक में चीन की परियोजनाओं की भारत कर रहा था आलोचना, अचानक हो गया ऐसा कि उठने लगे सवाल

चीन में यूएन की बैठक में भारतीय राजनयिक के भाषण के दौरान माइक में अचानक आई खराबी संदेह के घेरे में आ गई है। हैरत की बात तो यह है कि चीन ने ही बैठक की मेजबानी की थी।

चीन में 20 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र की बैठक में चीन की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस बैठक में कुछ ऐसा हुआ, जिसने पूरे विश्व को हैरान कर दिया है। दरअस्ल एक भारतीय राजनयिक का माइक अचानक बंद हो गया, जब वे चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) और उसकी महत्वाकांक्षी परियोजना सीपीईसी का कड़ा विरोध कर रही थीं। भारतीय राजनयिक प्रियंका सोहनी इन विवादास्पद परियोजनाओं पर भारत की आपत्तियों के बारे में बात कर रही थीं।

भारतीय राजनयिक के भाषण के दौरान माइक में अचानक आई खराबी संदेह के घेरे में आ गई है। हैरत की बात तो यह है कि चीन ने ही बैठक की मेजबानी की थी। बैठक के बीच में, माइक बंद हो गया, जिसे ठीक करने में कुछ मिनट लग गए। इसके बाद वीडियो स्क्रीन पर अगले स्पीकर का भाषण शुरू हो गया, लेकिन इसे चीन के पूर्व उप विदेश मंत्री व यूएन के अवर महासचिव लियू जेनमिन ने रोक दिया। जेनमिन ने भारतीय दूतावास की दूसरी सचिव प्रियंका सोहनी से अपना भाषण जारी रखने का आग्रह किया।

यूएन के अवर महासचिव लियू जेनमिन ने जताया खेद
कॉन्फ्रेंस रूम में माइक सिस्टम को फिर से शुरू होने के बाद, जेमिन ने कहा, “हमें खेद है। हमें कुछ तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं और अगले स्पीकर का भाषण शुरू कर दिया गया। मुझे इसके लिए खेद है और उन्होंने सोहनी को अपना भाषण फिर से शुरू करने के लिए कहा। इसके बाद भारतीय रजनयिक ने बिना किसी रुकावट के अपना भाषण जारी रखा।

भारतीय राजनयिक ने जताई आपत्ति
इस बैठक में सोहनी ने कहा,”हम कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता को साझा करते हैं और हमें विश्वास है कि इससे सभी को समान और संतुलित तरीके से व्यापक आर्थिक लाभ होगा। इस सम्मेलन में बीआरआई का कुछ उल्लेख किया गया है। यहां मैं कहना चाहूंगी कि हम चीन के बीआरआई से काफी प्रभावित हुए हैं। इसे तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) में शामिल करना भारत की संप्रभुता का उल्लंघन है।”

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संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की चिंता का कारण
बता दें कि बीआरआई का उद्देश्य चीन के प्रभाव को बढ़ाना और थल तथा समुद्री मार्गों के नेटवर्क के माध्यम से दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य एशिया, खाड़ी क्षेत्र, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ना है। सोहनी ने कहा, “कोई भी देश ऐसी पहल का समर्थन नहीं कर सकता, जो संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की मुख्य चिंताओं की अनदेखी करती हो।” सोहनी से पहले एक पाकिस्तानी अधिकारी ने बीआरआई और सीपीईसी की तारीफ की तथा इसे इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया।

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