#HunarHaat अल्पसंख्यक मंत्रालय का हुनर, आद्य क्रांतिकारी फडके और वीर सावरकर को भूल गए

क्रांतिकारियों के बलिदान को लेकर देश में नई प्रथा शुरू हुई है, जिसमें मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए जीवन अर्पण करनेवाले क्रांतिकारियों को सम्मान दिया जा रहा है। इस सबके बीच केंद्र सरकार के कुछ विभाग खुली आंखों के बाद भी इतिहास को नहीं देख पा रहे हैं या छुपाने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार स्वातंत्र्यवीर सावरकर के क्रांतिकार्य, त्याग और सामाजिक उत्थान के कार्यों का सदा उल्लेख करती है। परंतु, उन्हीं की सरकार का केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय मुंबई में आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत कार्यक्रम आयोजित करता है तो आद्य क्रांतिकारी वासुदेव बलवंत फडके और स्वातंत्र्यवीर सावरकर को भूल जाता है।

देश आजादी का आमृत महोत्सव मना रहा है, इस अवसर पर केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने मुंबई में ‘हुनर हाट’ कार्यक्रम का आयोजन किया है। यह 40वें हुनर हाट कार्यक्रम का आयोजन है। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घोषवाक्य ‘वोकल फॉर लोकल’ के अधीन स्वदेशी सामान, खानपान सबकुछ उपलब्ध था।

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आजादी का आमृत महोत्सव में भूल गए क्रांतिवीरों को
इस कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों की मूर्ति और फोटो प्रदर्शित की गई है। जिसमें स्वातंत्र्यवीर सावरकर और आद्य क्रांतिकारी वासुदेव बलवंत फडके की फोटो सम्मिलित नहीं की गई है। देश के स्वतंत्रता सेनानियों में जहां सभी प्रमुख नेताओं की फोटो दर्शाई जाती है, उसमें महाराष्ट्र के दो वीर सपूतों का स्मरण करना मोदी सरकार का अल्पसंख्यक मंत्रालय भूल जाता है, यह उस मंत्रालय का दुर्दैव ही है, जिसके नेतागण स्वातंत्र्यवीर सावरकर को नमन करते हैं, अनसंग हीरोज़ की बात करते हैं।

केंद्रीय मंत्रियों के हाथों उद्घाटन
हुनर हाट का उद्घाटन केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर की उपस्थिति में शुरू किया गया था। ये दोनों ही मंत्री भारतीय जनता पार्टी के इतिहास और जमीनी राजनीति को पहचानते हैं। इसके बाद भी मुंबई के कार्यक्रम में दो अग्रणी क्रांतिवीरों का उल्लेख न किया जाना भूल है या केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय की एलर्जी? यह बड़ा प्रश्न है।

हुनर हाट में क्या है?
40वें हुनर हाट में 31 से अधिक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से लगभग 1000 दस्तकार, शिल्पकार, कारीगर भाग ले रहे हैं। लकड़ी, पत्थर, मिट्टी और दूसरी कृत्रिम चीजों से बने परंपरागत खिलौनों जैसे रंग-बिरंगी गुड़ियों से लेकर डिजाइनर बोर्ड गेम्स, पजल्स, आदि की प्रदर्शनियां उपलब्ध हैं।

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