130 करोड़ लोगों ने दी सावरकर को ‘वीर’ की उपाधि… अमित शाह

सावरकर और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने यहाँ अनेक रचनाएँ कीं जो आज भी युवाओं को देशभक्ति और राष्ट्र सृजन की प्रेरणा देती हैं। इन हुतात्माओं के प्रयास के कारण ही हम आज आज़ादी की साँस ले रहे हैं। आज गौरव के साथ हम दुनिया के सामने विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनकर खड़े हैं उसकी नींव इन्हीं महान स्वतंत्रता सेनानियों ने रखी थी।

पोर्ट ब्लेयर में ऐतिहासिक सेल्युलर जेल स्थित शहीद स्तंभ पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वीर सावरकर और क्रांतिकारियों को नमन कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। अमित शाह ने सेल्युलर जेल का दौरा भी किया। गृहमंत्री ने कहा कि वीर सावरकर को वीर की उपाधि 130 करोड़ लोगों ने दी है। जिन लोगों ने स्तंभ से वीर सावरकर का नामपट उखाड़ा था, उनका काल लंबा नहीं चला।

ये आजादी का तीर्थ स्थल
अमित शाह ने आज़ादी का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें दूसरी बार आज़ादी के इस तीर्थस्थल पर आने का मौक़ा मिला है और वो जब भी यहां आते हैं, एक नई ऊर्जा और प्रेरणा लेकर जाते हैं। उन्होंने कहा कि ये वो जगह है जहां अनेक जाने-अनजाने स्वतंत्रता सेनानियों ने अमानवीय यातनाएं सहकर और अपना सर्वस्व बलिदान देकर भी वंदे मातरम और भारत माता की जय का उद्घोष किया है। देशभर के लोगों के लिए अंग्रेज़ों द्वारा बनाई गई ये सेल्युलर जेल सबसे बड़ा तीर्थस्थान है और इसीलिए सावरकर जी कहते थे कि तीर्थों में ये महातीर्थ है जहां आज़ादी की ज्योति प्रज्वलित करने के लिए अनेकानेक हुतात्माओं ने बलिदान दिए हैं।

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बुराई पर अच्छाई का प्रतीक
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज विजयादशमी है और इस दिन को बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है और आज़ादी का ये तीर्थस्थल भी बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। यहीं पर ये संकल्प लिया गया था कि भारत को कोई ग़ुलाम नहीं रख सकता, कितना भी ताक़तवर शासन हो, उसे कोई अधिकार नहीं है इस महान देश को ग़ुलाम बनाने का। उन्होंने कहा कि देश को आज़ाद हुए 75 साल होने वाले हैं और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने दुनिया में अपना स्थान प्रथम पंक्ति के लोकतांत्रिक देश के नाते प्रस्थापित किया है और आज उन सभी हुतात्माओं को सुकून और शांति का अनुभव होता होगा। श्री अमित शाह ने कहा कि अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत जिस रास्ते पर आगे बढ़ा है और जिस रास्ते पर चलकर सात साल में लंबी मंज़िल काटकर हम यहां खड़े हैं, वो पीछे मुड़ने का नहीं बल्कि आगे बढ़ने का रास्ता है। ये रास्ता सावरकार, सान्याल और भाई परमानंद जैसे वीर स्वतंत्रता सेनानियों की संकल्पना का भारत बनाने का रास्ता है।

वीर सावरकर ने कहा देश स्वतंत्र कराने से कोई नहीं रोक सकता
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज यहां वीर सावरकर को याद किए बिना कैसे रह सकते हैं। सेल्युलर जेल को अपने मनोभाव से तीर्थस्थान बनाने का काम सावरकर जी ने किया। उन्होंने पूरी दुनिया में एक संदेश दिया कि कितनी भी यातनाएं दो, कितना भी अमानवीय बर्ताव कर लो, लेकिन मेरे देश को स्वतंत्र करने के मेरे जन्मसिद्ध अधिकार को आप रोक नहीं सकते और इसकी सिद्धि वीर सावरकर ने यहां की। शाह ने कहा कि आज उन्होंने यहां सभी तत्कालीन यातनास्थल देखे और दस साल में सावरकर जी ने ना जाने कितने अत्याचार सहे और कितने ही स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी पर चढ़ते देखा और फिर भी वीर सावरकर दृढ़ता के साथ स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े रहे।

130 करोड़ लोगों ने दी वीर की उपाधि
अमित शाह ने कहा कि वीर सावरकर को वीर की उपाधि सरकार या प्रशासन ने नहीं दी, बल्कि 130 करोड़ों लोगों ने सावरकर जी के नाम के आगे वीर शब्द जोड़ा है और उनके पराक्रम और देशभक्ति की स्वीकारोक्ति के लिए जोड़ा है। उन्होंने कहा कि आज कुछ लोग सावरकर जी के जीवन पर सवाल उठा रहे हैं, बड़ा दुख होता है, दर्द होता है, वेदना होती है कि जिस व्यक्ति को एक ही जीवन में दो बार सज़ा हुई, उस व्यक्ति की देशभक्ति पर आप सवाल उठा रहे हैं। जिस व्यक्ति ने कई किलोमीटर दूर स्टीमर से छलांग लगाकर भारत के लिए लड़ने का फ़ैसला किया, फ़्रांस की धरती पर जाने का फ़ैसला किया, उस व्यक्ति की वीरता पर आप प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। जो कोल्हू का बैल बनकर 30 पाउंड तेल निकालने की सज़ा झेलता रहा, उस व्यक्ति की देशभक्ति पर आप सवाल उठा रहे हैं, ऐसे लोगों को शर्म आनी चाहिए। एक बार इस तीर्थस्थान पर आकर देखो, आपकी सभी शंकाओं का समाधान हो जाएगा।

अमित शाह ने कहा कि यहां स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में एक अमर ज्योति थी जो 24 घंटे और 365 दिन पूरे भारत को प्रेरणा देती थी और उस पर वीर सावरकर का नाम था और उसे उखाड़ दिया गया था। लेकिन, उखाड़ने वालों का समय लंबा नहीं होता है और आज गौरव के साथ वहां फिर वीर सावरकर का नाम है। उन्होंने कहा कि सावरकर जी के पास भी सब सुविधाएं थीं कि वो अपने निजी जीवन को अच्छे से जी सकें और वे बहुत विद्वान व्यक्ति थे और अनेक भाषाएं जानते थे। वे बहुत बड़े समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी, ऊर्जावान वक्ता थे और मां सरस्वती की उनकी लेखनी पर बड़ी कृपा थी। वे बहुत बड़े विचारक, साहित्यकार थे और इतने वीर कि एक ही जीवन में दो बार कालापानी की सज़ा मिली, और उस व्यक्ति पर विवाद खड़ा हो। लेकिन देश की जनता ने बड़े मन से, अति सम्मान और श्रद्धा के साथ सावरकर जी के नाम के आगे वीर शब्द जोड़ा है जिसे कोई मिटा नहीं सकता।

…और आत्मार्पण कर दिया
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि उनके जीवन की देश के प्रति समर्पण और देशभक्ति की उत्कृष्ट भावना का उदाहरण है कि जब सावरकर जी का शरीर काम नहीं कर सकता था, तब उन्होंने एक संदेश दिया कि मेरा शरीर अब भारत माता के काम का नहीं है और मैं अपने शरीर का आत्मविसर्जन करना चाहता हूं। खान-पान छोड़कर अपने आप को विसर्जित करके फिर से एक बार भारत माता की सेवा में आने के लिए जिस आदमी ने मार्ग प्रशस्त किया, वो दस साल अपने जीवन के यहां पर रहा है और इसीलिए ये तीर्थों में महातीर्थ, इसीलिए भारत के युवाओं के लिए प्रेरणास्थल है और इसीलिए यहां आकर ऊर्जा, प्रेरणा और शक्ति तीनों प्राप्त होती हैं।

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