महाराष्ट्र में मोदी के रत्न इन क्षेत्रों में बदलेंगे परिणाम?

2022 में महाराष्ट्र की 27 में से 15 महानगरपालिकाओं में चुनाव कराए जाने हैं। इनमें मुंबई, ठाणे, नासिक और औरंगाबाद जैसी अति महत्वपूर्ण महानगरपालिकाएं भी शामिल हैं।

केंद्रीय मंत्रिमंडल में महाराष्ट्र के चार नेताओं को शामिल कर एक साथ कई निशाने साधने की कोशिश की गई है। 2022 में प्रदेश की कुल 27 में से 15 महानगरपालिकाओं में चुनाव कराए जाने हैं। इनमें मुंबई, ठाणे, नासिक और औरंगाबाद जैसी अति महत्वपूर्ण महानगरपालिकाएं भी शामिल हैं। पार्टी ने इन क्षेत्रों से केंद्रीय मंत्रिमंडल में जनप्रतिनिधियों को शामिल कर उनके कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी दी है।

मुंबई
देश की सबसे अमीर महानगरपालिका मुंबई में 2022 में चुनाव कराए जाने हैं। मुंबई की आबादी और कुल राजस्व को देखें तो यह इसका महत्व कई राज्य या केंद्र शासित प्रदेश से कम नहीं है। इसलिए बीच-बीच में इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाने की चर्चा भी गरमाती रही है, लेकिन महाराष्ट्र की जनता और सरकार के लिए इस महानगर का काफी महत्व है। इसलिए जब भी यह आवाज उठती है, तो उसका पूरी ताकत से विरोध होने लगता है और यह मुद्दा दबा दिया जाता है। इस महानगर का महत्व राष्ट्रीय ही नहीं,अंतराष्ट्रीय स्तर पर है।

26 साल से शिवसेना का कब्जा
इस महत्वपूर्ण महानगरपालिका पर पिछले 26 साल से शिवसेना का कब्जा है लेकिन अब भाजपा की निगाहें इस पर लगी गई हैं। 2022 में होने वाले चुनाव में उसकी पूरी कोशिश है कि वह यहां से शिवसेना को बेदखल कर अपनी सत्ता कायम करे।

नारायण राणे पर विश्वास
समझा जा रहा है कि यह जिम्मेदारी घोषित या अघोषित रुप से महाराष्ट्र के कदावर नेता नारायण राणे को सौंपी जा सकती है। राणे को मंत्री बनाने और शपथ ग्रहण में पहले क्रमांक पर स्थान देकर पार्टी ने उनके कद को बढ़ाने के साथ ही उनसे उम्मीदें भी बढ़ा ली हैं। पार्टी ने 2022 के मुंबई मनपा ही नहीं, अन्य महानगरपालिकाओं के साथ ही 2024 के लोकसभा चुनावों में भी पार्टी के बेहतर प्रदर्शन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका की उम्मीद लगा रखी है। एक तरह से राणे की कोकण में पार्टी की ताकत बढ़ाने के साथ ही मुंबई महानगरपालिका के चुनाव के दौरान पहली परीक्षा होगी।

ठाणे
मुंबई के पास स्थित ठाणे महानगरपालिका का चुनाव भी अगले साल होने वाला है। इस लिहाज से पार्टी ने भिवंडी के भाजपा सांसद कपिल पाटील को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कर उनके कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। ठाणे में शिवसेना का दबदबा है। अब कपिल पाटील को केंद्रीय मंत्री बनाकर उन पर पार्टी ने शिवसेना के इस किले को ध्वस्त करने की जिम्मेदारी सौंपी है। वर्तमान में यहां शिवसेना की सत्ता है और पार्टी के नरेश म्हस्के महापौर हैं।

कपिल पाटील 
कपिल पाटील की बात करें तो वे भिवंडी से भाजपा सांसद हैं और ठाणे जिला परिषद के राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं। 2014 में वे लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए भाजपा में शामिल हुए थे। ओबीसी समुदाय से आने वाले पाटील दो बार सांसद रहे हैं। वे ठाणे क्षेत्र में भाजपा के एकमात्र सांसद हैं। उनसे शिवसेना के गढ़ में भाजपा को जनाधार बढ़ाने में मदद मिलने की संभावना है। इसका एक कारण यह भी है कि इस क्षेत्र में ओबीसी की बड़ी संख्या है, जिसका लाभ पार्टी को मिल सकता है।

नासिक
नासिक में भारतीय जनता पार्टी सत्ता में है, जबकि शिवसेना प्रमुख विपक्षी पार्टी है। इस मनपा की स्थापना 1992 में हुई थी। नासिक महानगरपालिका का चुनाव कोरोना के कारण लंबित है। स्थिति सुधरने पर यहां कभी भी चुनाव कराए जा सकते हैं। इस स्थिति में यहां फिर से पार्टी की सत्ता स्थापित करना बड़ी चुनौती है। पार्टी ने इस जिले के डिंडोरी निर्वाचन क्षेत्र की सांसद डॉ. भारती पवार को राज्य मंत्री बनाकर उन पर विश्वास जताया है। नासिक मनपा में पार्टी की स्थिति मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका हो सकती है।

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डॉ.भारती पवार
डॉ. भारती पवार नासिक जिले के डिंडोरी निर्वाचन क्षेत्र से सांसद हैं। उनका निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। वे पेशे से एमबीबीएस डॉक्टर हैं। उन्होंने 2014 का लोकसभा चुनाव राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के टिकट पर लड़ा था। 2019 मे वे भाजपा में शामिल हुईं और लोकसभा के लिए चुनी गईं। डॉ. भारती पवार उत्तर महाराष्ट्र क्षेत्र से शिक्षित,युवा आदिवासी चेहरा हैं। भाजपा को इसका लाभ मिल सकता है।

औरंगाबाद
औरंगाबाद मनपा की स्थापना 1982 में हुई। कोरोना महामारी के कारण इस मनपा का चुनाव लंबित है। अब कोरोना से राहत मिलती दिख रही है। इस स्थिति में यहां कभी भी चुनाव कराए जा सकते हैं। राज्यसभा सांसद डॉ. भागवत कराड को मंत्री बनाए जाने का पार्टी को लाभ मिल सकता है। वे यहां के महापौर रह चुके हैं।

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डॉ. भागवत कराड
भाजपा के राज्यसभा सांसद डॉ. भागवत कराड औरंगाबाद के पूर्व महापौर हैं। वे भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे गोपीनाथ मुंडे के वंजारा( ओबीसी) समुदाय से आते हैं। पेशे से डॉक्टर भागवत कराड को गोपीनाथ मुंडे ने ही राजनीति में लाया था। औरंगाबाद शिवसेना का गढ़ था, जिसे डॉ. कराड ने खत्म कर भाजपा को स्थापित किया। वे महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी माने जाते हैं।

महत्वपूर्ण जानकारी
महाराष्ट्र में अगले वर्ष 27 में से 15 महानगरपालिकाओं के चुनाव कराए जाने हैं। 2022 में न केवल मुंबई, ठाणे, नासिक महानगरपालिका के चुनाव कराए जाने हैं, बल्कि उल्हासनगर, पुणे, पिंपरी चिंचवड, सोलापुर, अकोला, अमरावती, अकोला, अमरावती और नागपुर के भी चुनाव होने हैं। इसके साथ ही कोरोना महामारी के कारण वसई-विरार, कल्याण-डोंबिवली, औरंगाबाद और नवी मुंबई के साथ ही कोल्हापुर मनपा के चुनाव भी टाल दिए गए हैं।

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