निधन के बाद भी गिलानी का पीछा नहीं छोड़ रहा विवाद! अब इस कारण पुलिस में मामला दर्ज

कश्मीर में शांति और सुरक्षा कारणों से गिलानी की मौत के बाद फोन और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं थीं, हालांकि उनकी मौत के पांचवें दिन वहां इंटरनेट सेवा बहाल की गई है।

जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता और तीन बार के विधायक सैयद अली शाह गिलानी का 1 सितंबर को निधन हो गया। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 2 सितंबर की सुबह उनका शांतिपूर्ण अंत्येष्टि किया। कुछ वीडियो सामने आए हैं कि पुलिस द्वारा उनके शव को जब्त करने से पहले गिलानी को पाकिस्तानी झंडे में लपेटा गया था। पुलिस ने बताया कि मामला आतंकवाद निरोधी कानून और यूएपीए के तहत दर्ज किया गया है।

सुरक्षा कारणों स उठाए गए कई कदम
कश्मीर में शांति और सुरक्षा कारणों से गिलानी की मौत के बाद फोन और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं थीं, हालांकि उनकी मौत के पांचवें दिन वहां इंटरनेट सेवा बहाल की गई है। कश्मीर में 4 सितंबर की रात ब्रॉडबैंड इंटरनेट और फोन सेवाएं बहाल होने के बाद यह वीडियो सामने आया। इससे पहले घाटी में मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद थी। लोगों को इकट्ठा होने से रोकने के लिए पुलिस ने ये प्रतिबंध लगाए थे।

एक वीडियो सामने आने से खुलासा
एक वीडियो में गिलानी के शव के आसपास भारी भीड़ जमा हो जाती है। भीड़ में महिलाएं भी हैं। गिलानी का शव पाकिस्तानी झंडा में लिपटा नजर आ रहा है। कमरे में काफी शोर-शराबा और चीख-पुकार मची हुई है। साथ ही दरवाजा खटखटाते हुए महिलाएं जोर-जोर से रोती नजर आ रही हैं। पुलिस भी कमरे में मौजूद थी। इस बीच, गिलानी को 2 सितंबर को भोर होने से पहले दफना दिया गया। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने जबरन शव निकाला और उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने दिया।

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पुलिस महानिदेशक ने दी जानकारी
जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने कहा, “सभी राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। गिलानी के परिवार के सदस्यों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया और वहां राष्ट्र विरोधी नारे लगाए। उन्होंने सोशल मीडिया और फोन कॉल का इस्तेमाल कर लोगों को भड़काने की भी कोशिश की। हमें गिलानी के घर के सदस्यों और अन्य लोगों से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं थी। पुलिस हमेशा गिलानी और उसके परिवार के संपर्क में थी।”

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