बीएमसी चुनाव 2022: भाजपा हिंदुत्व कार्ड तो शिवसेना खेलेगी मराठी कार्ड! अब क्या करेगी मनसे?

मुंबई महानगरपालिका चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ ही कांग्रेस ने भी कमर कस ली है। भारतीय जनता पार्टी ने जहां हमेशा की तरह हिंदुत्व को अपना चुनावी एजेंडा बनाया है, वहीं शिवसेना मराठी कार्ड खेलती हुई नजर आ रही है।

देश की सबसे अमीर मुंबई महानगरपालिका का चुनाव फरवरी 2022 में होना है, लेकिन इसकी चुनावी सरगर्मियां अभी से तेज होने लगी हैं। भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ ही कांग्रेस भी इसके लिए कमर कस चुकी है। भारतीय जनता पार्टी ने जहां हमेशा की तरह हिंदुत्व को अपना चुनावी एजेंडा बनाया है, वहीं शिवसेना मराठी कार्ड खेलती हुई नजर आ रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जहां बीच का रास्ता अपनाती दिख रही है और उसने अपने पत्ते अभी नहीं खोले हैं, वहीं कांग्रेस ने पहले से ही भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। टीकाकरण के बाद राम मंदिर परिसर में जमीन खरीदने में कथित रुप से घोटाले को भी उसने मुद्दा बनाया है। इस स्थिति में अब सवाल उठता है कि मराठी और स्थानीय मुद्दों पर हमेशा आक्रामक रुख अपनाने वाले राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना अब किस मुद्दे पर बीएमसी चुनाव लड़ती है, ये देखना काफी दिलचस्प होगा।

फिलहाल अयोध्या में निर्माणाधीन श्री राम मंदिर परिसर में जमीन खरीदी में कथित रुप से घोटाले के मुद्दे पर अब शिवसेना भी काफी आक्रामक हो गई है। पिछले कई दिनों से पार्टी के राज्य सभा सांसद संजय राउत द्वारा इस बारे में टिप्पणी करने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने भी आक्रामक रुख अपना लिया।

भाजपा ने की शिवसेना की आलोचना
अयोध्या में राम मंदिर परिसर में जमीन खरीदी में घोटाले का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ देशव्यापी अभियान चलाया है। वहीं महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी सरकार में शामिल कांग्रेस के साथ ही शिवसेना ने भी इस मुद्दे पर भाजपा की कड़ी आलोचना की है। इससे नाराज भाजपा युवा मोर्चा ने शिवसेना के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया।

भाजपा ने निकाला फटकार मोर्चा
इसी क्रम में भाजपा के युवा मोर्चा ने दादर स्थित शिवसेना भवन के सामने आंदोलन किया। उसके बाद शिवसेना के कार्यकर्ता भी शिवसेना भवन के सामने जमा हो गए। इसके बाद दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी के बाद नौबत मारपीट तक पहुंच गई। इस मारपीट में कई कार्यकर्ताओं को हल्की चोटें भी आई हैं। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस ने स्थिति पर नियंत्रण पा लिया और दोनों पार्टी के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर मामले को शांत कराने में बड़ी भूमिका निभाई।

वास्तव में क्या हुआ?
इस आंदोलन में तेजिंदर सिंह ने भाजपा का नेतृत्व किया। बता दें कि अयोध्या में श्री राम मंदिर परिसर में जमीन खरीदी में घोटाले का आरोप लगाते हुए शिवसेना ने इसकी आलोचना की थी। इसलिए भाजपा ने इसका विरोध करने के लिए फटकार मोर्चा निकाला था। भाजपा के मोर्चे का जवाब देने के लिए शिवसैनिक भी सेना भवन के आसपास जमा हो गए थे। इसी बीच दोनों पार्टी के कार्यकर्ताओं में बहस के बाद झड़प हो गई। पुलिस ने दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने के लिए हल्का बल प्रयोग भी किया।

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सोनिया-सेना हाय-हाय के लगाए नारे
बाद में भाजपा कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए राजारानी चौक पर जमा हो गए। इस बार भाजपा कार्यकर्ताओं ने ‘सोनिया सेना हाय- हाय’ के नारे लगाए। शिवसेना भवन से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर जैसे ही मोर्चा पहुंचा, पुलिस ने उसे रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी अधिक आक्रामक हो गए तो पुलिस ने उनको हिरासत में लेकर वैन में डाल दिया।

माहिम पुलिस थाने में मामला दर्ज
फिलहाल इस मामले के तूल पकड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस मामले में भाजपा के विलास आंबेकर,अक्षता तेंदुलकर और पांच अन्य की पिटाई करने का मामला माहिम पुलिस थाने में दर्ज कराया गया है। आरोपियों में नगरसेवक मिलिंद वैद्य, राजू पाटनकर, चेतन देवलेकर आदि शिवसैनिकों के नाम होने की जानकारी प्राप्त हुई है।

भाजपा की चेतावनी
भाजपा के दक्षिण मध्य मुंबई जिलाध्यक्ष राजेश शिरवाडकर ने इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि भाजपा नेता जब शिवसेना के आरोप का विरोध कर रहे थे तो शिवसेना नेताओं ने कायरतापूर्ण हमला किया। तेंदुलकर एक महिला पदाधिकारी हैं। उन्होंने कहा कि अगर शिवसेना इस तरह से हमला करेगी, तो उसे उसी की भाषा में जवाब दिया जाएगा।

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