वेदांता- फॉक्सकॉन परियोजना को लेकर भाजपा ने दी शिवसेना को ये चुनौती

भाजपा नेता केशव उपाध्याये ने कहा कि फर्जी तरीके से हासिल की गई सत्ता और वोटरों के वोटों को खूंटी पर लटकाकर प्रोजेक्ट के सौदे में हिस्सेदारी दोनों गंवाने से ठाकरे पिता-पुत्र उदास हैं।

वेदांता- फॉक्सकॉन परियोजना महाराष्ट्र से गुजरात जाने के मामले को लेकर राज्य में सियासत गरमाई हुई है। इस मामले को लेकर कल शनिवार को पुणे में शिवसेना नेता व पूर्व पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में जनाक्रोश आंदोलन करने का ऐलान शिवसेना ने किया है। शिवसेना के इस आंदोलन को भाजपा ने यह कहते हुए चुनौती दी है कि पहले परियोजना के लिए आवंटित की गई जमीन दिखाओ इसके बाद आंदोलन करो।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता केशव उपाध्याये ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि आदित्य ठाकरे को पारिवारिक विरासत से शिवसेना का नेतृत्व विरासत में मिला है। 24 सितंबर को वेदांत फॉक्सकॉन परियोजना को लेकर अपनी नाराजगी का खुलासा करने जा रहे हैं। आदित्य ठाकरे खुद इस बात का सबूत देंगे कि ठाकरे सरकार ने ढाई साल में इस परियोजना के संबंध में कोई प्रयास नहीं किया। पुणे के तलेगांव के पास उनका विरोध प्रदर्शन होने वाला है। केशव उपाध्याये ने कहा कि फर्जी तरीके से हासिल की गई सत्ता और वोटरों के वोटों को खूंटी पर लटकाकर प्रोजेक्ट के सौदे में हिस्सेदारी दोनों गंवाने से ठाकरे पिता-पुत्र उदास हैं। यह स्पष्ट है कि ठाकरे सरकार ने इस संबंध में एक साधारण समझौता भी नहीं किया कि यह परियोजना तलेगांव के पास कहां स्थापित की जाएगी। उपाध्याये ने यह भी चुनौती दी कि पहले इस परियोजना के लिए आरक्षित स्थान दिखाएं और उसके बाद ही विरोध करें। तलेगांव में भूमि अधिग्रहण फॉक्सकॉन की प्रस्तावित परियोजना के लिए नहीं था, बल्कि एमआईडीसी की प्रस्तावित चरण- 4 परियोजना के लिए था। उपाध्याये ने यह भी कहा कि संबंधित भूमि मालिकों को भी नहीं पता है कि यह जमीन फॉक्सकॉन परियोजना के लिए है, इसलिए ठाकरे को परियोजना की नियोजित साइट और इससे संबंधित आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड पहले से दिखाना चाहिए। ठाकरे पिता-पुत्र को महाराष्ट्र का कोई ज्ञान नहीं है।

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आदित्य ठाकरे से सवाल
उपाध्याये ने आदित्य ठाकरे से परियोजना को लेकर सवाल पूछे हैं। उन्होंने पूछा है कि आदित्य ठाकरे ने बार-बार कहा है कि तलेगांव के पास फॉक्सकॉन परियोजना की योजना बनाई गई थी। इस परियोजना के लिए ठाकरे सरकार द्वारा तलेगांव में कौन सी साइट की पेशकश की गई थी? क्या एक विशिष्ट साइट के लिए राजस्व रिकॉर्ड बनाए गए थे? इस परियोजना के लिए ठाकरे सरकार ने कितनी आधिकारिक बैठकें कीं और उसमें क्या बातचीत हुई? ठाकरे सरकार ने परियोजना के लिए कौन सी रियायतें दीं? आदित्य ठाकरे को आंदोलन से पहले महाराष्ट्र को इन सवालों के जवाब देना चाहिए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि वे पहले से सुनिश्चित कर लें कि जिस स्थान पर वे विरोध करने जा रहे हैं, वहां प्रस्तावित परियोजना का रिकॉर्ड है। अन्यथा गलत जगह पर विरोध करके महाराष्ट्र को धोखा देने का प्रयास विफल हो जाएगा और उनका विरोध बेनकाब हो जाएगा।

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