कश्मीर दौरा… और उनके समक्ष नतमस्तक हो गए गृहमंत्री…

जम्मू कश्मीर को लेकर केंद्र सरकार की नीति एकदम स्पष्ट रही है। अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 और समाप्ति और सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक समीक्षाएं इसी नीति के अंतर्गत लिये गए निर्णय हैं।

जम्मू कश्मीर के दौरा पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पहुंचे हैं। वे तीन दिन राज्य में रहेंगे और स्थानीय लोगों से मिलेंगे, प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। यह दौरा इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि, राज्य में एक बार फिर पाक प्रायोजित आतंकवाद सिर उठाने लगा है। अपने दौरे की शुरुआत में अमित शाह आतंकी हमलों में हुतात्मा हुए पुलिस अधिकारी परवेज अहमद के घर गए।

गृहमंत्री ने परवेज अहमद की पत्नी और बच्चों से भेंट की इस दौरान वे दोनों हाथ जोड़कर खड़े दिखाई दिये। इस दौरे में सरकार की ओर से हुतात्मा परिवार को सरकारी नौकरी के पत्र और अन्य सहायताएं सौंपी गई। इस भेंट में जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह भी मौजूद थे।

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नतमस्तक का अर्थ
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का वीर पत्नी के समक्ष हाथ जोड़कर यह सम्मान कई अर्थों में महत्वपूर्ण है।

  • वीरों के साथ जम्मू कश्मीर ही नहीं बल्कि भारत सरकार भी दृढ़ता से खड़ी
  • वीर परिवारों की चिंता स्थानीय प्रशासन नहीं दिल्ली की गद्दी भी रखती है
  • विशेष सुरक्षा का अर्थ अब आतंक की अब खैर नहीं
  • गृहमंत्री के दौरे के पहले कश्मीर पहुंच गया है विशेष सुरक्षा दस्ता

रुकेगी टार्गेट किलिंग!
कश्मीर में सबसे बड़ी समस्या टार्गेट किलिंग की है, जिसमें इस महीने भर में 11 निर्दोष लोगों को आतंकियों ने अपना निशाना बनाया है। इसमें हिंदू, सिख और प्रवासी मजदूर अधिक निशाने पर रहे। गृहमंत्री के इस दौरे में इस पर मंथन होगा, जिसका परिणाम भी जल्द ही दिखेगा।

आतंक के विरुद्ध युद्ध

  • आतंकियों की नाकेबंदी – केंद्रीय गृहमंत्री के दौरे के पहले ही कश्मीर में परिस्थितियों को अनियंत्रित करनेवालों की नाकेबंदी शुरू हो गई थी।
  • बंकर, अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनाती – राज्य में 8 वर्षों के पश्चात बंकर फिर बनाए गए हैं। इसके साथ ही केंद्रीय सुरक्षाबलों की अतिरिक्त टुकड़ियों को तैनात किया गया है।
  • आतंकियों सहायकों को राज्य निकाला – आतंकी संगठनों के लिए कश्मीर में ऑनग्राउंड वर्कर के रूप में कार्य करनेवालों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। ऐसे 26 लोगों को पब्लिक सेफ्टी एक्ट 1978 के अंतर्गत आगरा स्थानांतरित कर दिया गया है।
  • हिरासत में लिए गए हैं संशयास्पद लोग – राज्य में आतंकी हमलों में वृद्धि को देखते हुए अलग-अलग स्थानों से 700 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। इनमें से जिनकी भूमिका आतंकी गतिविधियों में गंभीर पाई गई, उन्हें पब्लिक सेफ्टी ऐक्ट 1978 के अंतर्गत गिरफ्तार कर लिया गया।
  • मोबाइल इंटरनेट पर नजर – श्रीनगर के जिन क्षेत्रों में परप्रांतीय मजदूरों पर हमले हुए थे, वहां मोबाइल इंटरनेट सेवाएं नियंत्रित की गई हैं।

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