आपात काल के 46 सालः जानिये, किस नेता ने क्या कहा?

आपात काल के 46 साल पूरे हो गए हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आदेश पर देश के इतिहास में पहली और अंतिम बार आपात काल लागू कर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को पूरी तरह खत्म कर दिया गया था।

25 जून 1975 आपात काल लागू कर देश में राजनैतिक संकट पैदा कर दिया गया था। उस काले दिन के 46 साल पूरे हो गए हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आदेश पर देश के इतिहास में पहली और अंतिम बार आपात काल लागू कर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को पूरी तरह खत्म कर दिया गया था। उस दिन को याद करते हुए तमाम राजनीतिज्ञों ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

आपात काल के काले दिनों को भूलाया नहीं जा सकताः पीएम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस दिन को याद करते हुए कहा कि आपातकाल के काले दिनों को कभी नहीं भूलाया जा सकता है। 1975-1977 के बीच देश के संस्थानों का विनाश देखा गया। पीएम ने आगे कहा, ‘आइए, हम भारत की लोकतांत्रिक भावना को मजबूत करने के लिए हर संभव कोशिश करने का संकल्प लें और हमारे संविधान मे निहित मूल्यों पर खरा उतरें।’

स्वतंत्र भारत का काला अध्यायः शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उस दिन को स्वतंत्र भारत के इतिहास का काला दिन करार दिया। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, ‘देश में एक परिवार के खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने के लिए आपातकाल लागू किया गया था।’ उन्होंने इसे स्वतंत्र भारत के इतिहास में काला अध्याय करार दिया।

वह दौर हम सभी की स्मृतियों में ताजाः राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उस दिन को याद करते हुए ट्वीट किया,’भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में आपातकाल एक ‘काले अध्याय’ के रूप में जाना जाता है। देश की लोकतांत्रिक परम्पराओं पर कुठाराघात करने के लिए जिस तरह संविधान का दुरुपयोग हुआ, उसे कभी भूला नहीं जा सकता। आज भी वह दौर हम सभी की स्मृतियों में ताजा है।’

सिंह ने कहा, ‘इस दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए देश में आंदोलन भी हुए और लोगों ने न जाने कितनी यातनाएं सहीं। उनके त्याग, साहस और संघर्ष को हम आज भी स्मरण करते हैं और प्रेरणा प्राप्त करते हैं। लोकतंत्र की रक्षा में जिन लोगों की भी भूमिका रही है, मैं उन सभी को नमन और अभिनंदन करता हूं।’

लोकतंत्र को खत्म करने की थी कोशिशः देवेंद्र फडणवीस
लोकतंत्र को खत्म करने के प्रयत्न का पूरे देश ने मिलकर मुकाबला किया।आपात काल देश का काला दिन था।

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