हृदय की सुरक्षा के लिए क्या खाएं? क्या न खाएं?

बचपन से ही स्मार्ट खाने की आदत डालनी चाहिए, जो तब होता है जब एथेरोस्क्लेरोसिस शुरू हो चुका होता है। कभी-कभी रक्त धमनियों की रुकावट दिखने में 20 से 30 साल लग जाते हैं और तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इस प्रकार प्राकृतिक खाद्य पदार्थों के उच्च स्वस्थ आहार, फलियां और अनाज का संयोजन, कम वसा वाले मांस के विकल्प लेना हृदय के निरोगी आहार के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण है और इसे निश्चित रूप से अमल में लाया जाना चाहिए।

विश्व में होनेवाली अधिकतर मृत्यु की मुख्य वजह हृदय और शिराओं (रक्त वाहिकाओं) से संबंधित बीमारियाँ हैं। हृदय रोग से तात्पर्य हृदय की विभिन्न दुरावस्थाओं से हैं। हृदय संबंधी सबसे आम बीमारी कोरोनरी धमनी रोग (सीएडी) है, जिससे दिल का दौरा तक पड़ सकता है।

प्रियम नाईक, सैफी अस्पताल के आहार विशेषज्ञ अधिकारी (डायटेटिक्स ऑफिसर) बताते हैं मुंबई हृदय रोग और हृदयाघात संबंधी कई खतरों को टाला या पूरी तरह से रोका जा सकता है। इन खतरों को रोककर लोग बीमार होने की आशंका से बच सकते हैं। यह खतरा टालने के लिए तंबाकू सेवन कम करें, उच्च रक्तचाप, शारीरिक निष्क्रियता, उच्च रक्त कोलेस्ट्रॉल, मोटापे, अत्यधिक मद्यपान और कुपोषण से बचें। आयु या पारिवारिक इतिहास से जुड़े खतरों को कम नहीं किया जा सकता है। जो खतरे के जितना करीब होगा, उसके बीमार होने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।

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हृदय के स्वास्थ्य में आहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और हृदयरोग के आपके खतरे पर भी सीधा असर डालता है। कुछ निश्चित खाद्य पदार्थ हैं जो रक्तचाप, ट्राइग्लिसराइड्स, कोलेस्ट्रॉल के स्तर और दाह पर असर डालते हैं जिनसे हृदय रोग का खतरा होता है। सैफी अस्पताल के प्रियम नाईक कहते हैं कि, आपके हृदय को निरोगी रखने के लिए कुछ खाद्य पदार्थों का अधिकतम उपयोग करना चाहिए, वे हैं…

1. हरी पत्ती वाली साग-सब्जियां – पालक, मेथी, कोलोकेशिया के पत्ते अमूमन उनमें पाए जाने वाले विटामिन, खनिज और एंटी ऑक्सीडेंट के लिए जानेजाते हैं, इसमें विटामिन के और नाइट्रेट्स भी अधिक होता है, जो रक्तचाप को कम करके धमनियों के कार्य को सुधारता है। अध्ययन बताते हैं कि अधिक से अधिक हरी पत्तियों के सेवन से हृदय रोग का खतरा उतना ही कम से कम हो जाता है।

2. साबुत अनाज – आमतौर पर साबुत अनाजों में गेहूं, ज्वार-बाजरा, भूरे चावल (ब्राउन राइस) और जई आते हैं। परिष्कृत अनाज की तुलना में साबुत अनाज में बहुत बड़ी मात्रा में फाइबर होता है जो एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम करता है जिससे हृदय रोग होने का खतरा भी कम हो जाता है। संशोधन बताते हैं एक दिन में तीन या उससे अधिक बार साबुत अनाज लेने से हृदय रोग का खतरा 22% कम हो जाता है। इसी के साथ साबुत अनाज सिस्टोलिक रक्तचाप के खतरे को भी कम करते हैं।

3. बेरीज़ (जामुन) – स्ट्रॉबेरी, ब्लू बेरी, ब्लैक बेरी और रास्पबेरी में बड़े पैमाने पर एंथोसायनिन जैसे समृद्ध एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, यह ऑक्सीडेटिव तनाव और दाह से राहत दिलाते हैं, जिनसे हृदय रोग हो सकता है। मेटाबोलिक सिंड्रोम को हम उन स्थितियों का समुच्चय कह सकते हैं, जो हृदयरोग की आशंका को बढ़ाते हैं। लेकिन बेरी खाने से हृदय रोग के बहुआयामी खतरे कम किए जा सकते हैं।

4. एवोकाडोस – एवोकाडो को मोनो अनसैचुरेटेड वसा का उत्कृष्ट स्रोत कहा जाता है, जो हृदय रोग के जोखिम को कम करता है, क्योंकि यह सीधे-सीधे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है। एवोकाडो में पोटेशियम भी बहुतायत में होता है जो हृदय के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक पोषक तत्व है। शोध से पता चला है कि जिन लोगों ने नियमित तौर पर एवोकाडो खाया है उनमें मेटाबॉलिक सिंड्रोम होने का खतरा दूसरों की तुलना में आधा रहा है।

5. वसायुक्त मछली और मछली का तेल – वसायुक्त मछली जैसे सैल्मन, मैकेरल, सार्डिन और टूना में ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है।ओमेगा 3 फैटी एसिड की दैनिक खुराक का एक अन्य विकल्प मछली का तेल है। मछली का तेल या उसके सप्लिमेंट्स लेने से रक्त में ट्राइग्लिसराइड्स कम हो जाता है, धमनियों का कार्य बेहतर होता है और रक्तदाब कम होता है।

6. अखरोट और बादाम – अखरोट को फाइबर और मैग्नीशियम, तांबा और मैंगनीज जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का एक बड़ा स्रोत माना जाता है। अखरोट एलडीएल और कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप को भी कम करता है। बादाम मोनोअनसैचुरेटेड वसा और फाइबर का एकअच्छा स्रोत है। शोध बताते हैं कि बादाम एचडीएल कोलेस्ट्रॉल के उच्च स्तर के कारक हैं,जो रक्त के अवरोधों को कम कर धमनियों को शुद्ध करते हैं। लेकिन ध्यान रहें सूखे मेवे जितने अच्छे पोषकतत्वों के स्रोत हैं उतने ही वे कैलोरीज़ में भी अधिक होते हैं। ऐसे में संतुलित मात्रा में इन्हें लेने की सलाह दी जाती है।

7. बीज – चिया बीज, अलसी के बीज हृदय के स्वस्थ पोषक तत्वोंयानी फाइबर और ओमेगा-3 वसा के काफी अच्छे स्रोत हैं। इसलिएइन बीजों को अपने आहार में शामिल करने से हृदय रोग से जुड़े खतरों जैसे दाह, रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स मेंकमी देखी जा सकती है।

8. दालें और फलियां – इनमें प्रतिरोधी स्टार्च होता है, जो पाचन को रोकता है और आपकी आंत में फायदेमंद बैक्टीरिया द्वारा किण्वित होता है। बीन्स खाने से ट्राइग्लिसराइड्स, कोलेस्ट्रॉल, रक्तचाप और दाह का स्तर कम होता है जिससे हृदय निरोगी होने में मदद मिलती है।

9. लहसुन – इसमें एलिसिन नामक यौगिक होता है जो औषधीय गुणों वाला होता है और हृदय को निरोगी रखने में मददगार होता है। लहसुन का अर्क अवरोधों को रोकता है जो रक्त के थक्कों और दिल का दौरा पड़ने के खतरे को कम करने में मदद करता है। कच्चा लहसुन खाने से पहले उसे अच्छे से पीस लें और पकाने से थोड़ी देर पहले वैसा ही रहने दें।

10. जैतून का तेल और कैनोला तेल – भूमध्यसागरीय आहार में यह मुख्य माना गया है जो, एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर, मोनो अनसैचुरेटेड वसा में भी समृद्ध है। संशोधनों में देखा गया है कि जैतून का तेल निम्न रक्तचाप और हृदय रोग के जोखिम को कम करता है। तेलों की जब बात होती है तो ऐसे तेलों का उल्लेख किया जाता है जिनमें पॉली अनसेचुरेटेड वसा का अच्छा मिलाप हो जैसे जवा कुसुम, सूरजमुखी, मक्का, बिनौले और सोयाबीन का तेल। इनमें कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है। साथ ही मार्जरीन, मेयोनेज़ और यहां तक कि मक्खन में पाए जाने वाले संतृप्त वसा का सेवन भी कम किया जाना चाहिए

ध्यान देने योग्य बात है कि ओट ब्रान, साइलियम भूसी, मसूर, बीज, फलियों में घुलनशील फाइबर पाए जाते हैं। कुछ फल जैसे सेब, अंगूर, नाशपाती और अन्य फलों में भी पेक्टिन की मात्रा अधिक होती है। यह घुलनशील फाइबर कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है इससे इन्हें हृदय से दोस्ताना आहार के रूप में लिया जाना चाहिए।

अपने आहार में नमक कम करना भी निहायत ज़रूरी है। टेबल या भोजन पकाते समय ऊपर से नमक डालने की आदत कम करें, दूसरे डिब्बाबंद याप्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, रेडीमेड सूप, बेक किए गए सामान, डिब्बाबंद याप्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के सेवन में भी कमी लाएं। ताजा खाना खाएं घरका बना सूप और स्ट्यू बनाएं।

अधिक जानकारी के लिए मुंबई के सैफी अस्पताल में प्रियम नाईक से संपर्क किया जा सकता है।

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