क्या युवा वर्ग के लिए ज्यादा घातक साबित हो रही है कोरोना की दूसरी लहर?

कोरोना अपना रुप ही नहीं, शिकार भी बदल रहा है। पहली लहर में जहां वह बड़ी उम्र के लोगों को अपना शिकार बना रहा था, वहीं दूसरी लहर और तीसरी लहर में उसके शिकार बदलने के सबूतस मिल रहे है।

कोरोना की दूसरी लहर युवाओं के लिए बहुत ही खतरनाक साबित हुई है। आंकड़ों को देखकर इस दावे को खारिज नहीं किया जा सकता है। 1 मई से अब तक देश में कोरोना से संक्रमित होने वालों में 26 प्रतिशत मरीज 18 से 30 के बीच के हैं।

आंकड़े झूठ नहीं बोलते
सरकार की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार 1 मई से 7 मई के बीच कुल संक्रमितों में से 26.58 प्रतिशत मरीज 18 से 30 साल के बीच के हैं। इससे पहले 8 मई से 14 मई के बीच यह आंकड़ा 25.89 प्रतिशत था। इसी तरह 15 मई से 21 मई के बीच यह आंकड़ा 25.64 प्रतिशत और 22 से 25 मई तक कुल संक्रमितों में युवाओं का प्रतिशत 25.60 था। इन आंकड़ों को देखकर कहा जा सकता है कि धीरे-धीरे ही सही, कोरोना संक्रमण की मार युवा वर्ग पर बढ़ रह रही है।

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विशेषज्ञों का दावे में दम
विशेषज्ञों का दावा है कि कोरोना की तीसरी लहर में बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। हालांकि एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा था कि ऐसे कोई संकेत नहीं हैं। लेकन हाथ कंगन को आरसी क्या, कहावत के अनुसार आंकड़ों को देखकर विशेषज्ञों की चोतावनी सही लगती है।

कोरोना कमजोर, खतरा बरकरार
बता दें कि भारत में कोरोना कमजोर जरुर दिख रहा है, लेकिन इसके खतरे को कम कर आंकना आत्मघाती हो सकता है। इसलिए फिलहाल सावधानी में ही समझदारी है, यह मानते हुए कोरोना रोधी सभी नियमों पर कड़ाई से पालन करना जरुरी है।

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