प्लांट में कैसे तैयार की जाती है ‘प्राणवायु’! जानने के लिए पढ़ें ये खबर

प्लांट में तैयार होने के बाद मेडिकल ऑक्सीजन को एक बड़े कैप्सुलनुमा टैंकर में भरकर अस्पताल में पहुंचाया जाता है। मरीजों तक यह दो तरीके से पहुंचती है।

देश में कोरोना एक बार फिर उफान पर है। लेकिन 12 राज्यों में स्थिति ज्यादा खराब है। इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में ऑक्सीजन को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कहा जा रहा है कि दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में पिछले कुछ घंटों में ऑक्सीजन की किल्लत के कारण 25 मरीज दम तोड़ चुके हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे तक ऑक्सीजन को लेकर केंद्र के साथ ही पड़ोसी राज्यों पर राजनीति और भेदभाव करने के आरोप लगा रहे हैं। इन सबके बीच मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए देश में सड़क, रेल और आकाश तीनों मार्गों का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन वर्तमान में स्थिति में कोई बहुत बड़ा सुधार नहीं है।

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प्लांट से मरीज तक पहुंचने की यात्रा
प्लांट में तैयार होने के बाद मेडिकल ऑक्सीजन को एक बड़े कैप्सुलनुमा टैंकर में भरकर अस्पताल में पहुंचाया जाता है। मरीजों तक यह दो तरीके से पहुंचती है।

पहला-जिन अस्पतालों में ऑक्सीजन की पाइप लाइन की व्यवस्था होती है, वहां मरीजों के बेड तक यह सीधे पाइप से पहुंचती है।

दूसरा- जिन अस्पतालों में पाइप लाइन की व्यवस्था नहीं होती है, वहां रोगी को सिलेंडर के माध्यम से ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

वर्तमान स्थिति
देश में बड़े पैमाने पर कोरोना संक्रमण फैलने के कारण कई सरकारी और निजी अस्पतालों को कोविड अस्पताल में परिवर्तित कर दिया गया है। इसमें कई अस्पतालों में गैस पाइप लाइन की व्यवस्था नहीं है और अगर है भी तो अस्पताल में बनाए गए कोविड बेड तक यह सुलभ नहीं है।

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प्राणवयु के बिना जीना असंभव
हमारे वायुमंडल में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध है। यही उसका सबसे बड़ा स्रोत है। हमारे जीवन में सांसों को चलाने के लिए ऑक्सीजन अनिवार्य है। हम अपनी सांसों के जरिए कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ते हैं और ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं। इस ऑक्सीजन के जरिए हमारे शरीर का रक्त शुद्ध होता है।

ऐसे तैयार होती है प्राणवायु(ऑक्सीजन)

  • अस्पतालों में उपयोग होने वाली ऑक्सीजन को प्लांट में तैयार किया जाता है। इसकी एक पूरी प्रक्रिया होती है। इसे क्रायोजोनिक डिस्टिलेशन प्रोसेस कहा जाता है। चूंकि वायुमंडल में सभी गैसों का मिश्रण होता है, इस प्रक्रिया के तहत हवा में मौजूद पानी के कण, कार्बन डाई ऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन अलग हो जाते हैं।
  • प्लांट में हवा से ऑक्सीजन को अलग किया जाता है। इस प्रक्रिया में यूनिक एयर सेपरेशन  तकनीक का प्रयोग किया जाता है। इसके तहत हवा को कंप्रेस किया जाता है, ताकि हवा को फिल्टर करके उससे अन्य गैसों को अलग किया जा सके।
  • इस तकनीक के माध्यम से हवा से सभी अशुद्धियों को निकाल दिया जाता है। इसके बाद फिल्टर की गई हवा को ठंडा किया जाता है। फिर इस हवा को डिस्टिल किया जाता है।
  • इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन को अन्य गैसों से अलग किया जाता है। इसके बाद ऑक्सीजन को लिक्विड फॉर्म में एकत्र किया जाता है। वर्तमान में एक पोर्टेबल मशीन द्वारा हवा से ऑक्सीजन को अलग करके मरीज तक पहुंचाया जाता है।

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