कोरोना की तीसरी लहर को कैसे दी जा सकती है मात? जानने के लिए पढ़ें ये खबर

कोरोना की पहली और दूसरी लहर में जहां 2.87 लाख लोगों की सांसें उखड़ चुकी हैं, वहीं पता नहीं तीसरी लहर कितने लोगों को अपना शिकार बनाए। इसी दहशत में लोग जी रहे हैं।

देश में कोरोना की दूसरी लहर थोड़ी थमती हुई दिख रही है, लेकिन इस बीच तीसरी लहर के शोर से लोगों में घबराहट पैदा होने लगी है। पहली और दूसरी लहर में देश में जहां 2.87 लाख लोगों की सांसें उखड़ चुकी हैं, वहीं पता नहीं तीसरी लहर कितने लोगों को अपना शिकार बनाए। इसी दहशत में लोग जी रहे हैं। इसे लेकर हर दिन आ रहे विशेषज्ञों के बयान लोगों के साथ ही सरकार की भी चिंता बढ़ा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर जून-जुलाई तक थम जाएगी। उसके बाद छह से आठ महीनों में महामारी की तीसरी लहर आने की आशंका व्यक्त की जा रही है। यह आशंका भारत सरकार के विज्ञान मंत्रालय के तहत विज्ञान और प्रौद्यिगिकी विभाग द्वारा स्थापित वैज्ञानिकों के तीन सदस्यों ने व्यक्त की है। इसी के साथ भारत सरकार को अलर्ट कर दिया गया है।

क्या कहता है सूत्रा मॉडल?
सूत्रा मॉडल का उपयोग करते हुए वैज्ञानिकों ने भविष्यवाणी की है कि मई के अंतिम सप्ताह तक 1.5 लाख नए मामले आ सकते हैं, जबकि जून के अंत तक हर रोज देश में 20 हजार मामले सामने आ सकते हैं। इसके बाद जुलाई तक यह लहर थम जाएगी।

इन राज्यों में पीक पार
पैनल के सदस्य और आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल ने कहा है कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, केरल, सिक्किम, उत्तराखंड, गुजरात और हरियाणा के आलावा केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली तथा गोवा में पीक आ चुका है। तमिलनाडु में 29 से 31 मई और पुडुचेरी में 19-20 मई को पीक आने की संभावना है। इसके साथ ही देश के पूर्व और पूर्वोत्तर राज्यों में भी अभी पीक आना बाकी है।

क्या है सूत्रा मॉडल?
बता दें कि सूत्रा( SUTRA) मॉडल जैसे गणितीय मॉडल महामारी की तीव्रता के बारे में जानकारी देने में सहायता करते हैं। यह मॉडल पिछले साल कोविड के प्रभाव के बारे में पता लगाने के लिए अस्तित्व में आया था। यह भारत सरकार द्वारा देश में कोरोना के प्रसार के बारे में अनुमान लगाने के लिए तैयार किया गया था।

सत्य होने की गारंटी नहीं
हालांकि जिस तरह मौसम विभाग का अनुमान हर बार सच नहीं होता, वैसे ही इसका अनुमान भी गलत हो सकता है। इस बारे में समिति ने स्वीकार किया है कि कोरोना की दूसरी लहर के बारे में उसका अनुमान ज्यादा सटीक नहीं रहा। आईआईटी हैदराबाद के प्रोफेसर विद्यासागर का कहना है कि हमें अनुमान था कि दूसरी लहर में प्रति दिन 1.5 लाख नए मामले सामने आएंगे, लेकिन हमारा ये आकलन गलत साबित हुआ। बता दें कि विद्यासागर सूत्रा मॉडल से जुड़े हुए हैं।

सबसे बड़ा हथियार
कोरोना की तीसरी लहर का खौफ का सकारात्मक पहलु भी है। नहीं मालूम कि यह कितना खतरनाक हो सकती है, लेकिन फिलहाल केंद्र के साथ ही राज्य सरकारों को भी ये मानकर तैयारी करने की जरुरत है कि तीसरी लहर में तबाही का दौर शुरू हो सकता है। इस हालत में दूसरी तैयारियों के साथ ही इसे नियंत्रित करने के लिए सबसे कारगर उपाय टीकाकरण पर जोर देना है। टीकाकरण ही वह वरदान है, जिससे देशवासियों को इसकी चपेट में आने से बचाया जा सकता है।

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लक्ष्य को पूरा करना जरुरी
वैसे केंद्र सरकार ने अपने रोडमैप में दावा किया है कि इस वर्ष के अंत तक देश के सभी लोगों का टीकाकरण हो जाएगा। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी दावा किया है कि दिसंबर यानी इस साल के अंत तक सभी का टीकाकरण हो जाएगा। केंद्र सरकार के साथ ही राज्य सरकारों को भी बिना कोई राजनीति किए इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जो कुछ भी करना पड़े, करना चाहिए। इससे सस्ता और बढ़िया कोरोना से बचाव का दूसरा उपाय हो ही नहीं सकता।

बच्चों और युवाओं को ज्यादा खतरा
कोरोना के नए वेरिएंट ने दूसरी लहर में युवाओं और बच्चों को भी अपना शिकार बनाया है। तीसरी लहर के बारे में भी विशेषज्ञों का मानना है कि इसका बच्चों पर ज्यादा असर पड़ेगा। इसलिए सरकार को जल्द से जल्द सभी लोगों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू कर देना चाहिए। अभी तक देश में वैक्सीन की कमी के कारण 18-44 वर्ष के लोगों के लिए भी पर्याप्त टीका उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। यह बहुत ही खतरनाक स्थिति है। जो भी करना पड़े, सरकार को सिर्फ 18-44 वर्ष तक के आयुवर्ग को ही नहीं, सभी उम्र के लोगों के लिए टीका उपलब्ध कराना चाहिए।

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सर्वे की रिपोर्ट
इस बीच दिल्ली में किए गए सीरो सर्वे के अनुसार देश की राजधानी में तीसरी लहर में 60 प्रतिशत बच्चे कोरोना संक्रमित हो सकते हैं। दरअस्ल तीसरे सीरो सर्वे के बाद राजधानी में वयस्क से ज्यादा प्रतिशत एंटीबॉडी बच्चों में पाई गई है। इसका मतलब यह है कि वे संक्रमित हो चुके हैं। भले ही अधिकांश मामले बहुत ही मामूली रहे हों, और गंभीर परिणाम देखने को नहीं मिल रहे हों। इससे पहले जनवरी में पांचवें सीको सर्वे में 56 प्रतिशत और पिछले साल अक्टूबर में कराए गए सीरो सर्वे की चौथी रिपोर्ट में मात्र 34.7 प्रतिशत बच्चे संक्रमित पाए गए थे। सर्वे में 5 से 17 साल के बच्चों को शामिल किया गया था।

बच्चों का भी हो टीकाकरण
हालांकि अभी तक बच्चों का टीकाकरण विश्व के किसी भी देश में शुरू नहीं किया गया है, लेकिन अमेरिका और कनाडा समेत कई देशों ने इसके लिए पूरी तैयारी कर ली है। भारत में भारत बायोटेक को बच्चों के टीके के ट्रायल के दूसरे और तीसरे फेज की मंजूरी दी गई है। इसमें देर न करते हुए सरकार को चाहिए कि जितनी जल्दी हो सके, इसका ट्रायल पूरा कर इसे बच्चों के लिए उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही बच्चों के लिए दूसरी कंपनियों को भी वैक्सीन तैयार करने का लाइसेंस दिया जाना चाहिए। इतनी बड़ी आबादी के लिए किसी एक टीके पर निर्भर रहना देश के लिए घातक साबित हो सकता है। हालांकि मिल रही जानकारी के भारतीय टीके कोवक्सीन का भी इस दिशा में प्रयास जारी है।

समय का सदुपयोग जरुरी
कई विशेषज्ञों का कहना है कि देश में तीसरी लहर आने में 6-8 महीनों का समय बाकी है। तब तक यहां ज्यादातर लोगों का टीकाकरण हो जाएगा। इसलिए इसका उतना ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, जितना पहली और दूसरी लहर में पड़ा है।

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