धर्म की नगरी में आस्था के गुलाल से सराबोर देव…

होलिका दहन और रंगों से धर्म की नगरी भी सराबोर रही। इस बीच कोविड-19 के संक्रमण का भी ध्यान रखा गया था और भीड़ न इकट्ठा हो इसलिए सीमित लोगों को प्रवेश दिया गया था। प्रस्तुत है उज्जैन से श्री महाकाल की गुलाल होली।

इसी प्रकार श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भी सप्तर्षी आरती में बाबा श्री काशी विश्वनाथ को गुलाल अर्पण किया गया।

श्री बांके बिहारी मंदिर, मथुरा में होली उत्सव की शुरुआत हो गई है। 25 मार्च को एकादशी के दिन फूलों की होली से इसकी शुरुआत हुई है। रविवार को होलिका दहन और सोमवार को धुलेंडी है।

मथुरा के बांके बिहारी मंदिर में पुष्प होली खेली गई। श्रीकृष्ण और राधे संग भक्तों ने अपनी आस्था से सराबोर होलिका का रसपान किया।

उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में होली सप्ताह भर पहले से ही प्रारंभ हो जाती हैै। ब्रज क्षेत्र के मथुरा, वृंदावन,बरसाना, नंदगांव, गोकुल में होली का अद्भुत रंग और संस्कृति देखने को मिलती है। बरसाना के राधा रानी मंदिर में 22 मार्च को लड्डू होली मनाई गई। इसके अगले दिन दिनांक 23 मार्च को बरसाना की रंगीली गलियों में सैकड़ों राधा अपने मोहन पर लट्ठमार की बौछार करती दिखीं।

ऐसी मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने राधा के साथ तेसू के फूलों से होली खेला था। इस प्रथा का पालन आज भी वृंदावन और संपूर्ण ब्रृज के मंदिरों में होता है जब तेसू के फूलों के सुखाकर निर्मित केसरिया, पीले रंगों से भक्त सराबोर होकर होली खेलते हैं।

भगवान के जन्म के बाद मां देवकी ने जिस पोतरा कुंड में वस्त्र और उपवस्त्र धोए थे वह कुंड भी विभिन्न रंगों की लाइट से नहाया हुआ है।

 

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