गणेशोत्सव में ग्राहकी को लेकर क्या कहतें हैं व्यापारी?

गणेशोत्सव उत्सव की तैयारी में बाजार सज गए हैं, मोदक, लाडू प्रसाद से लेकर अगरबत्ती, धूप और सजावटी सामानों से दादर बाजार भरा हुआ है। 5 सितंबर को गणेशोत्सव शुरू होने से पहले का रविवार था, इसके कारण बाजार में भीड़ थी। परंतु, अन्य वर्षों की तुलना में गणेश भक्तों की खरीदारी का प्रवाह इस बार कम है जिससे व्यापारी चिंतित हैं। कोविड-19 के कारण पहले ही व्यवसाय बहुत समय तक बंद थे, इसके कारण पिछले वर्ष के गणेशोत्सव में तो व्यवसाय ही नहीं हुआ। जबकि इस वर्ष गणेशोत्सव में भले ही कारोबार शुरू हो गया है, लेकिन ग्राहकों की खरीदारी कम है, इसलिए निवश किया गया पैसा वापस आएगा या नहीं इसको लेकर चिंता है।

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दादर बाजार रंग गया
कोविड-19 के चलते पिछले गणेशोत्सव में घर बैठे फेरीवालों ने इस साल आकर्षक सामान बेचने के स्टॉल लगाए हैं. दादर, मालाड, बोरीवली, भांडुप, घाटकोपर, विलेपार्ले, मुलुंड आदि में लाइटिंग, तोरण, फूल, कपड़े आदि के स्टॉल लगे हैं। दादर में जावले मार्ग पर इस गणेशोत्सव के लिए आवश्यक सभी सामानों के स्टालों के साथ फुटपाथ बी खोल दिए गए हैं। स्टेशन से रानाडे मार्ग और छबीलदास गली तक कपड़े और फलों से लदे हैं, डिसिल्वा रोड आकर्षक फूलों और हार, फूलों से सुसज्जित है।

फेरीवाले चिंतित
इस साल, कई लोगों ने कोविड-19 के कारण अपनी नौकरी खो दी है, इसलिए स्ट्रीट वेंडर सस्ती कीमतों पर सामान उपलब्ध कराने के लिए प्रयत्नशील हैं। गणेशोत्सव मनाने के लिए सभी अपनी आर्थिक शक्ति के अनुसार खरीदारी करता है। इसलिए दादर के बाजारों में गरीब से लेकर अमीर तक हर कोई मोहित है। इस साल कई व्यापारियों ने कर्ज लेकर स्टॉल लगाए गए हैं, लेकिन ग्राहकों की कमी के चलते चिंता है।

लोकल ट्रेन से घटी भीड़
फेरीवालों के अनुसार लोकल ट्रेन बंद होने के इस वर्ष कारोबार पर असर पड़ा है। गणेशोत्सव की खरीदारी के लिए दादर आनेवालों को दिक्कत हो रही है। जवाले मार्ग पर गणेशोत्सव के दौरान लगनेवाले सजावटी कपड़े और दुपट्टे बेचने वाले मनीष कुमार के अनुसार पहले ग्राहकों की भीड़ कारण फुर्सत नहीं मिलता थी, लेकिन अब ग्राहकों का इंतजार करना पड़ता है। फिर भी इस वर्ष की स्थिति पिछले गणेशोत्सव से अच्छी है।

नुकसान की लटकती तलवार
बूंदी के लड्डू, मोदक, बर्तन, प्लेट, गिलास बेचने वाले चंद्रकांत सालुंखे कहते हैं कि, दादर में भीड़ तो रहती है, लेकिन खरीदारी की नहीं। नौकरी पेशा लोग गांव जाने से आठ दिन पहले ही सारी खरीदारी कर लेते हैं।परंतु, इस बार खरीदारी वैसी नहीं हो रही है जैसी होनी चाहिए। उनका कहना है कि खरीदारी के लिए गिने-चुने ग्राहक ही हैं और इसकी वजह है लोकल ट्रेन का बंद होना है। हमने लॉकडाउन के डर से इस साल कम माल खरीदा है। अभी तक जो बिक्री हुई है उससे निवेश की राशि भी निकल पाएगी इसकी चिंता हैय़

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